लाभार्थी के अभाव में लौट गए
कृषि योजना के 10 लाख रुपये
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना तिलहन की थी धनराशि
- दो वित्तीय वर्षों में आए 17 लाख रुपये, वापस हो गए 10 लाख
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। कितनी अजीबो-गरीब बात है कि लाभार्थी नहीं मिलने के कारण लघु एवं सीमांत किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मिली धन राशि खर्च नहीं हो पाई।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना तिलहन योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2017-18 में 8.62 लाख रुपये जिले को मिला था। इस योजना के जरिए 2775 किसानों को लाभ दिया जाना था। इसके लाभार्थी नहीं मिलने के कारण मात्र 2.65 लाख रुपये ही खर्च हुए शेष धनराशि शासन को वापस हो गई। इसी योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2018-19 में भी 8.62 लाख रुपये की धनराशि जिले को मिली। इस योजना से भी 1945 किसानों को लाभ दिया जाना था। इस वर्ष भी लाभार्थी किसान नहंी मिलने के कारण मात्र चार लाख रुपये ही खर्च किए जा सके। शेष धनराशि शासन को वापस कर दी गई।
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तिल व सरसों की खेती को मिलता है अनुदान
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के तहत तिलहन किसानों को तिल व सरसों की खेती के लिए अनुदान मिलता है। इस योजना के जरिए एक हेक्टेयर तक की खेती के लिए तीन हजार रुपये अनुदान दी जाती है। साथ ही दो किग्रा से अधिक बीज की खरीद करने वालों को अनुदान दिया जाता है। किसान पहले स्वयं की धनराशि से बीज की खरीद करता है, इसके बाद उसके खाते में धनराशि भेजी जाती है। लेकिन जिले में तिल व सरसों की खेती बेहद कम होती है।
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना तिलहन के तहत कम संख्या में लाभार्थी पाए गए। इस कारण इस योजना के तहत मिली शेष धनराशि शासन को वापस कर दी गई है।
पीके कन्नौजिया, उप कृषि निदेशक