बर्डपुर के अहिरवनडीह का प्राथमिक विद्यालय जर्जर हाे गया है।
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सिद्धार्थनगर। इटवा सीएचसी, नौगढ़ पीएचसी के स्वास्थ्य कर्मी और जिले के कई परिषदीय स्कूलों के भवन जर्जर हो चुके हैं। बरसात में यहां छत टपकती है और छत में लगा प्लास्टर भी टूटकर ऊपर गिरता रहता है। ऐसे यहां तैनात कर्मी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे हैं। यही नहीं यहां आने वाले मरीज और बच्चे भी जान जोखिम में डालकर यहां आते हैं।
जिले में पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश से वैसे तो सभी के समक्ष कुछ न कुछ दिक्कतें हैं। मगर, तीन दशक पूर्व बना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नौगढ़ का भवन जर्जर हो चुका है। परिसर नीचा होने के कारण बारिश कमरों में भर जाता है। भवन की दीवारें जर्जर हो चुकी हैं। छत से पानी टपकता है। इससे कहीं बैठने लायक नहीं रहता है। दीवारों के प्लास्टर आए दिन टूट कर गिरा करते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य कर्मी जैसे- तैसे काम करते हैं।
कुछ ऐसा ही हाल इटवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भी है। 27 वर्ष पूर्व बने स्वास्थ्य केंद्र में 30 बेड की इमरजेंसी चलती है। यहां कुल चिकित्सकों समेत 30 कर्मचारी हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर अस्पताल में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों का कहना है कि बारिश शुरू होने से पहले ही हम लोगों को डर सताने लगा है। कारण भवन जर्जर हो चुका है। भारी बारिश में कब भवन ढह जाए इसका कोई पता नहीं है। हम लोग खुद तो खतरे मेें रहते ही हैं।
इसके साथ ही अस्पताल में आने वाले मरीज भी बीमारी से अधिक भवन ढहने के खतरे के बीच रहते हैं। बारिश के होने के बाद पूरा परिसर जलमग्र हो गया है। छत से पानी टपक रहा है। कहीं भी बैठने लायक नहीं है, लेकिन क्या करें। नौकरी करनी है तो जिंदगी की फिक्र कब तक करेंगे। इस संबंध में इटवा के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वीके वैद्य ने बताया कि भवन की स्थिति खराब है। इसकी मरम्मत के लिए पत्र पत्र भेजा गया है। वहीं सीएमसअाे डॉ. आरके मिश्र ने बताया कि दोनों स्वास्थ्य केंद्रों के संबंध में जानकारी है। मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। धन का आवंटन होते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
जर्जर स्कलों की रिपोर्ट मांगी जाएगी
प्राथमिक स्कूल थरौली, प्राथमिक स्कूल कृष्णानगर, जोगिया ब्लॉक का प्रावि दुगौरा समेत जिले में बड़ी संख्या में ऐसे परिषदीय स्कूल हैं, जिनका भवन जर्जर है। बरसात में यहां छत टपकती है। पानी टपकने से प्लास्टर छोड़ने लगता है जो कभी भी किसी हादसे का सबब बन सकता है। सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, मगर जिम्मेदारों का इस गंभीर समस्या पर ध्यान नही पड़ रहा है। ऐसे स्कूलों में अभिभावक भी बच्चों को भेजने से कतरा रहे हैं। बीएसए राम सिंह ने बताया कि वे अभी नए आए। इस संबंध में सभी बीईओ से रिपोर्ट मांगी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर शासन को सूचित किया जाएगा।