- पेंशन योजना की पात्रता में 15 हजार सालाना आय का मानक
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सरकार असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को बुढ़ापे में सहारा देने के लिए 3000 रुपये मासिक पेंशन की योजना चला रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पात्रता की शर्तों ने इस योजना को कागजों तक सीमित कर दिया है। योजना के तहत इसमें वही श्रमिक शामिल हो सकते हैं, जिनकी मासिक आय 15 हजार रुपये या उससे कम है।
ग्रामीण इलाकों में काम करने वाला सामान्य मजदूर खुद सवाल उठा रहा है कि जब सरकार उसे मनरेगा के तहत साल में न्यूनतम 125 दिन काम देती है और उसी से उसकी सालाना आय 25 से 30 हजार रुपये हो जाती है, तो वह इस योजना में आएगा कैसे? मजदूरों का कहना है कि यह पहली योजना है, जिसमें काम करना ही अपात्रता बन गया है।
जानकार कहते हैं कि पात्रता की यह दीवार इतनी सख्त है कि उसके भीतर खड़ा होने वाला कोई दिखाई नहीं देता। लोग यह भी पूछ रहे हैं कि जब न्यूनतम मजदूरी और सरकारी रोजगार खुद 15 हजार की सीमा पार करा देता है, तो अत्यंत गरीब की परिभाषा आखिर किस आधार पर तय की गई है।
मनरेगा मजदूर बताते हैं कि वे किसी निजी नौकरी या स्थायी रोजगार में नहीं हैं। साल में कुछ महीने काम मिलता है, कुछ महीने खाली रहते हैं, लेकिन सरकारी मजदूरी की वजह से उनकी आय 15 हजार की सीमा पार कर जाती है। एक मजदूर साफ शब्दों में कहता है, अगर हम काम न करें, तभी गरीब माने जाएंगे। काम किया तो कहा जाएगा कि आपकी आय ज्यादा है।
यही स्थिति असंगठित क्षेत्र के दूसरे श्रमिकों की भी है। रिक्शा चालक, फेरीवाले, ईंट-भट्ठा मजदूर, निर्माण श्रमिक और घरेलू कामगार बताते हैं कि उनकी आय महीने-दर-महीने बदलती रहती है। किसी महीने 6-7 हजार, किसी महीने 10-12 हजार मिलते हैं, लेकिन साल जोड़ने पर आंकड़ा 15 हजार से ऊपर चला जाता है और यहीं से वे योजना से बाहर हो जाते हैं।
फेरी लगाकर कपड़े बेचने वाले राम किशोर कहते हैं, कि हम न बीपीएल में फिट बैठते हैं, न इन नई योजनाओं में ही पात्र हैं। कागज में हम ज्यादा कमाने वाले बन जाते हैं, जबकि हकीकत में रोज की कमाई तय नहीं होती।
योजना के दायरे में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं जैसे नाम भी शामिल हैं, लेकिन यहां भी वही समस्या सामने आ रही है। मानदेय और कभी-कभार मिलने वाली प्रोत्साहन राशि जोड़ दी जाए, तो आय सीमा टूट जाती है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे असंगठित मानी जाती हैं, लेकिन पेंशन की बात आते ही उनकी आय ज्यादा बता दी जाती है।
श्रमिक नेता केके तिवारी कहते हैं कि अगर योजना का उद्देश्य सबसे कमजोर वर्ग को सुरक्षा देना है, तो पात्रता की कसौटी इतनी नीचे क्यों रखी गई कि मेहनत करने वाला खुद-ब-खुद बाहर हो जाए।
खुद की घोषणा ही प्रमाणपत्र
श्रम विभाग की तरफ से जारी पत्र के अनुसार, योजना में पंजीकरण स्वयं घोषणा के आधार पर किया जाना है। आय प्रमाणपत्र अनिवार्य नहीं है, लेकिन आवेदक को यह घोषित करना होगा कि उसकी मासिक आय 15 हजार रुपये से अधिक नहीं है। गलत घोषणा की स्थिति में भविष्य में लाभ रोके जाने का प्रावधान भी है। यही कारण है कि कई मजदूर आगे आने से ही हिचक रहे हैं।
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कोट.........
दोनों योजनाओं में पंजीकरण के लिए आयु वर्ग के अनुसार 55 से 200 रुपये तक का मासिक अंशदान करने पर 60 वर्ष की आयु के बाद 3000 रुपये मासिक पेंशन मिलेगी, जबकि मृत्यु की स्थिति में पति या पत्नी को 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन का प्रावधान है। इन योजनाओं में जन सुविधा केंद्रों से पंजीयन कराया जा सकता है। लाभार्थी स्वयं भी https://mandhan.in पोर्टल पर पंजीयन कर सकते हैं। पंजीयन के लिए आधार कार्ड, बैंक खाता, मोबाइल नंबर एवं नामिनी का विवरण आवश्यक है।
- उज्ज्वल कुमार त्रिपाठी, श्रम प्रवर्तन अधिकारी