सिद्धार्थनगर। इंसेफेलाइटिस के खात्मे के लिए योगी सरकार भले ही गंभीर हो, मगर स्थानीय तंत्र पर कोई खास असर नहीं है। जिला अस्पताल इसका उदाहरण है। यहां इंसेफेलाइटिस पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए स्थापित पीआईसीयू में अनवरत बिजली आपूर्ति की व्यवस्था पिछले तीन माह से ठप है। हर रोज 5-6 घंटे बिजली आपूर्ति बंद रह रही है। बार-बार कटों से आपूर्ति बंद होने से बच्चों का दवा-उपचार प्रभावित हो रहा है। हैरानी है कि कई बार पत्र लिखने के बाद भी इस व्यवस्था को सुचारु करने के लिए जिम्मेदारों में कोई हरकत नहीं हो रही।
नेपाल सीमा पर स्थित जिला इंसेफेलाइटिस के डेंजर जोन में है। यहां हर साल दर्जनों लोग इंसेफेलाइटिस के कारण जान गंवा रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा संख्या बच्चों की रहती है। पीड़ितों के बेहतर दवा-उपचार के लिए ही यहां बच्चों का आईसीयू (पीआईसीयू) स्थापित है। इसे बेहतर ढंग से काम करने के लिए 24 घंटे अनवरत विद्युत आपूर्ति की जरूरत है। अस्पताल प्रशासन ने 78 लाख रुपये खर्च कर बिजली का स्पेशल कनेक्शन कराया भी है, मगर पिछले तीन माह से अनवरत आपूर्ति की व्यवस्था ध्वस्त है। कनेक्शन में फाल्ट के चलते अस्पताल व पीआईसीयू को सामान्य आपूर्ति ही मिल पा रही है। इसमें भी बार-बार कट का असर मरीजों के दवा-उपचार पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक पीआईसीयू में स्थापित मशीनों के लिए 24 घंटे अनवरत आपूर्ति की जरूरत होती है, लेकिन बार-बार कट लगने से दिक्कत आ रही है। कई बार तो मरीज को ऑक्सीजन या नेब्यूलाइजर की जरूरत के समय ही बिजली गुल हो जाती है। ऐेसे में जनरेटर शुरू करने तक मरीज को इंतजार करना पड़ता है, जो कई बार खतरनाक हो जाता है। सूत्रों की मानें तो पिछले कई दिनों से 6-8 घंटे तक आपूर्ति बाधित हो रही है। जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. रोचस्मति पांडेय का कहना है कि पीआईसीयू व एसएनसीयू के बेहतर संचालन के लिए ही बिजली विभाग से स्पेशल कनेक्शन लिया गया है, जिससे 24 घंटे निर्बाध बिजली मिल सके। यह व्यवस्था फिलहाल बाधित है।
कई बार विभाग को पत्र लिखा गया, लेकिन कोई सुधार नहीं हो रहा। जनरेटर चलाकर काम लिया जा रहा है, मगर जनरेटर चलाने में थोड़ा वक्त तो लगता ही है। उधर, बिजली विभाग के एक्सईएन घनश्याम मिश्र का कहना है कि एनएच-233 के निर्माण कार्य के चलते कनेक्शन में फाल्ट आया है। इसे सुधार के लिए प्रयास किया जा रहा है।
इंसेफेलाइटिस के दो मरीज भर्ती
आम तौर पर इंसेफेलाइटिस का सीजन जुलाई से नवंबर तक माना जाता है, मगर जिले में अभी से मरीज आने शुरू हो गए हैं। अप्रैल से अब तक जिला अस्पताल में जेई के चार मामले सामने आए हैं। दो मरीजों का अभी भी उपचार चल रहा है। जोगिया थाना क्षेत्र के गंगवल सलाहुद्दीन अपनी 7 वर्षीय पुत्र रुखसाना को लेकर पीआईसीयू में भर्ती हैं। वहीं उसका के भिटिया निवासी मनोज का साढ़े 3 वर्षीय पुत्र आकाश भी बीमारी की चपेट में है। दोनों का उपचार जिला अस्पताल में चल रहा है। परिवार के लोगों का कहना है कि शुरुआत में सामान्य बुखार मानकर वह आस-पास उपचार कराते रहे, लेकिन बाद में स्थिति गंभीर होने पर जिला अस्पताल आए तो इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई। डॉ. संजय चौधरी की देख-रेख में दोनों का उपचार हो रहा है। दोनों की स्थिति अभी नियंत्रण में है। बता दें कि सरकार ने सभी सीएचसी-पीएचसी स्तर पर भी इंसेफेलाइटिस के उपचार का इंतजाम करने की घोषणा की है, लेकिन यहां केवल जिला अस्पताल में ही सुविधा मिल पा रही है।