सिद्धार्थनगर। सांसद और चार विधायक सभी एक ही दल के हैं। पांचवें विधायक भी सत्ताधारी पार्टी के गठबंधन में शामिल हैं। बावजूद इसके जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल। यहां हाल पिछले तीन साल से है। 28 लाख की आबादी वाले जिले के सरकारी चिकित्सालयों में कुल स्वीकृत 201 पदों में से 112 पद रिक्त हैं। 112 में से 12 अध्ययन को गए हैं और 21 ने कार्यभार तो ग्रहण किया पर ये आए ही नहीं। प्रशासन द्वारा सूचना देने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई ऐसे में तैनाती के आंकड़ों में ये 33 चिकित्सक जिले में मौजूद हैं।
यह हाल तब है जब जिला देश के 115 और प्रदेश के आठ पिछड़े जिलोें में शुमार है।नीति आयोग द्वारा गोद लिए इस जिले पर प्रधानमंत्री की सीधी नजर है। इस कारण केंद्रीय टीम का लगातार भ्रमण के साथ ही नोडल अफसर जिले में भ्रमण भी कर चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था से सभी वाकिफ भी हैं, बावजूद चिकित्सकों समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के पदों को भरने की दिशा में कोई सार्थक कदम नहीं उठाया जा रहा है।
नीति आयोग द्वारा अति पिछड़े की श्रेणी में जिले का चयन किया गया है। इस निर्णय के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए लगातार लिखा-पढ़ी की जा रही है। जल्द ही रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। चिकित्सकों के पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराकर आवेदन मांगे गए हैं।
कुणाल सिल्कू, जिलाधिकारी