सिद्धार्थनगर। जिले में सिंचाई निर्माण खंड और ड्रेनेज खंड के अंतर्गत आने वाले बांधों की लंबाई 453 किलोमीटर है। ये कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हैं। ऐसे में अगर पिछले साल की तरह इस बार बाढ़ आई तो सैकड़ों गांव जलमग्न हो जाएंगे। हाल यह है कि बंधों की मरम्मत के लिए दोनों विभागों ने कुल 16 करोड़ रुपये की डिमांड की थी। बावजूद इसके महज 55 लाख रुपये ही आवंटित हुए। विभागीय अफसरों के अनुसार, मिली रकम से नरकट और झाड़-झंगाड़ की सफाई करना ही संभव नहीं है। ऐसे अगर बाढ़ आती है, तो स्थिति भयावह होगी।
सिंचाई निर्माण खंड के पास 296 किलोमीटर बांध के रख-रखाव की जिम्मेदारी है। पहले सिंचाई निर्माण खंड ने शासन से बांधों की मरम्मत के लिए 12 करोड़ रुपये मांगे थे। लेकिन विभाग को महज 50 लाख रुपये ही मिल सके। इनमें 20 लाख रुपये रिजर्व रख लिए गए हैं। बचे हुए 30 लाख 296 किलोमीटर बांधों की मरम्मत की जिम्मेदारी मिली है। कुछ ऐसा ही हाल ड्रेनेज खंड का भी है। 157 किलोमीटर बांध की मरम्मत के लिए शासन से 25 लाख रुपये ही मिले हैं। सिंचाई निर्माण खंड के अधिशाषी अभियंता आरके सिंह ने बताया कि जितने रुपये मिले है। उतने रुपये में सभी बांधों की मरम्मत संभव नहीं है। बूढ़ी राप्ती के अशोगवा-नगवा बांध की स्थिति काफी खराब है। जहां पर काम चल रहा है। इसके अलावा ककरही गोनहा बांध पर भी काम चल रहा है।
अशोगवा बांध बेहद महत्वपूर्ण
जिले में कुल 37 बांध हैं। इसमें सिंचाई निर्माण खंड के जिम्मे जिले के 22 बांध हैं। इनमें से एक भी बांध टूट जाता है तो कई गांव तबाह हो जाएंगे। इन बांधों में सबसे महत्वपूर्ण अशोगवा-नगवा बांध है। इसकी लंबाई 13 किलोमीटर के करीब है। इसके अलावा ककरही-गोनहा बांध की की लंबाई 11 किलोमीटर है। नरकटहा-शहर सुरक्षा बांध, नरकटहा-सोनखर बांध, सोनखर-टेड़िंया बांध, भवारी-गायघाट-अजगरा बांध, मदरहा-अशोगवा बांध, अशोगवा-नगवा बांध, सूपा-एडवांस बांध, ककरही-गोनहा बांध, फत्तेपुर-खजुरडाड़-अजगरा बांध, बैदोला-डुमरियागंज, बांसी डुमरियागंज, बांसी-बनकटा, दलपतपुर-परसोहन, सोनखर-हयातनगर, गौरा-धोबहा, डुमरियागंज-बांसी, बांसी-पनघटिया, भगौतापुर-रिंग, कैथोलिया-रिटायरमेंट, छगड़िहवा-सोनबरसा, भोजपुर-शाहपुर बांध है।
बांसी व शोहरतगढ़ में मची थी तबाही
पिछले साल आई बाढ़ ने बांसी व शोहरतगढ़ को सबसे अधिक प्रभावित किया था। मुख्यमंत्री ने शोहरतगढ़ के खैरी शीतल प्रसाद गांव में जाकर खुद दौरा किया था। बांसी के सतवारी, नवईला, बगौतापुर, कम्हरिया, तारा गुजरौलिया आदि गांव पूरी तरह से मैरुंड हो चुके थे। इसके अलावा तीन दर्जन गांव मैरुंड थे। साथ ही 100 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित थे। कुछ ऐसा ही हाल शोहरतगढ़ का भी था।