इटवा (सिद्धार्थनगर)। बूढ़ी राप्ती नदी पर बना दलपतपुर-परसोहन बांध के डेंगहर गांव के पास टूटने से कई गांव जलमग्न हो गए। सूचना पाकर मौके पर एसडीएम एम.जुबेर बेग व विभागीय अधिकारी पहुंचे। गांव के लोगों ने आरोप लगाया कि अगर समय रहते बचाव कार्य हुआ होता तो यह स्थिति नहीं पैदा होती।
ग्रामीणों का कहना है कि मंगलवार को रात से ही बूढ़ी राप्ती नदी का पानी उफान पर था। दलपतपुर-परसोहन बांध पर ग्राम डेंगहर के पास बंधे में रैट होल के कारण पानी रिस रहा था। रात में पुलिस विभाग व एसडीएम इटवा को सूचना दी गई। मौके पर पहुंचे तहसीलदार ने उच्चाधिकारियों व विभागीय अधिकारियों को सूचना दी। बचाव कार्य में बरती गई लापरवाही के चलते बांध करीब 20 मीटर टूट गया। इससे डेंगहर, परसोहन, देवियापुर, सिकरा बुजुर्ग, भदाव, व मुडिला मिश्र आदि दर्जनों गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए। इन गांवों का संपर्क दूसरे क्षेत्रों से कट गया है। डेंगहर गांव के लोगों का कहना है कि अगर समय रहते बांध पर बचाव व मरम्मत कार्य हुआ होता तो बांध टूटता नहीं। उधर, दलपतपुर-परसोहन बांध पर ही दलपतपुर, गदाखौवा, बुढ्ढी खास व छगड़िहवा के पास हो रही कटान पर मरम्मत कार्य कराकर बांध को कटने से बचाने का कार्य शुरू कर दिया गया हैं। दलपतपुर में सिचाई निर्माण खंड के मुख्य अभियंता राधा कृष्ण, अधिशासी अभियंता आरके सिंह मौके पर रहकर बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं। बूढ़ी राप्ती नदी का कहर क्षेत्र में बरकरार हैं। यहां के इमिलिया, नवडीहवा, कोहलवा, बसंतपुर, लमुइया, बेलभारिया व मुड़िलिया आदि गांव पिछले तीन दिनों से जलमग्न हैं। बुधवार को प्रशासन के तरफ से लगाए गए नांव इन गांवों में भेजे गए हैं ताकि लोग बाहर आ जा सके। दलपतपुर-परसोहन बांध का निरीक्षण विधायक डॉ.सतीश द्विवेदी, एसडीएम इटवा एम.जुबेर बेग व सीओ डुमरियागंज ने किया। विधायक ने विभागीय अधिकारियों को बचाव कार्य में लापरवाही न बरतने की हिदायत दी। उधर पूर्व विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय व पूर्व सांसद मो.मुकीम ने भी तहसील क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और पीड़ितों से मिलकर प्रशासन से मिलने वाले राहत सामग्री वितरण की जानकारी ली। प्रशासन की व्यवस्था पर असंतोष जताया।
22 टोलों में आवागमन के लिए सिर्फ दो नाव
परसा। बूढ़ी राप्ती पर बना दलपतपुर-परसोहन बांध के टूटने से क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित अधिकतर संपर्क मार्गों पर पानी चढ़ने के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है। घरों में पानी घुस गया है और लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटक रहे हैं। बांध टूटने से बढ़नी ब्लॉक क्षेत्र पूरी तरह से बाढ़ के पानी में डूब गया। बाढ़ पीड़ित पांच ग्राम सभाओं के लगभग 22 टोलों में आवागमन के लिए केवल दो नावों की व्यवस्था की गई है, जो नाकाफी साबित हो रही हैं।
ढेबरुआ-बेवां राज्यमार्ग पर झकहिया के पास दो फीट पानी चढ़ गया है। बाढ़ के कारण बिगौवा नाले से नजरगढ़वा, बिगौवा से पथरदेईया, पकड़िहवा गांव जाने वाले मार्ग पर कमर भर पानी बह रहा है। पकड़िहवा, नजरगढ़वा, खजुरिया शर्की के विश्वकर्मा डीह, पथरदेईया, नंदनगर, गुलरगेजवा, अकरहरा आदि गांवों में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। वहीं इन गांवों में बड़े पैमाने पर हो मछली पालन व्यवसाय को भी तगड़ा झटका लगा है। तालाबों से मछलियां बाढ़ के पानी साथ बह गईं जिससे लोगों का लाखो रूपए का नुकसान हुआ। बूढ़ी राप्ती व घोरही नदी के किनारे स्थित गांवों में एक बार फिर बाढ़ के पानी के चलते स्थिति और अधिक विकराल होती जा रही है। प्रशासन के राहत कार्य में लापरवाही बरतने पर भी बाढ़ पीड़ितों में रोष व्याप्त है।
राहत सामग्री के नाम पर प्रशासन कर रहा खिलवाड़
परसा। बसपा नेता व पूर्व प्रत्याशी जमील सिद्दीकी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से मिलकर मिलने वाली राहत सामग्री के संबंध में जानकारी ली। जमील ने कहा कि राहत सामग्री के नाम पर दिए जा रहे एक किग्रा लाई, सौ ग्राम चना व गुड़ से पीड़ित परिवारों का कितना भला होगा। इतनी मात्रा में राहत सामग्री देकर प्रशासन केवल पीड़ितों साथ मजाक कर रहा है। उन्होंने प्रशासन से प्रभावित गांवों में चिकित्सकीय टीम, नावों की और अधिक व्यवस्था तथा राहत सामग्री का उचित वितरण करने की मांग की।