खेसरहा क्षेत्र के बनकटा में प्राथमिक विद्यालय का जर्जर भवन।
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खेसरहा। शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों को बेहतर शिक्षा व सुविधा देने के लिए प्रदेश सरकार प्रयासरत है। मगर जिम्मेदारों की उदासीनता सरकार की मंशा को तार-तार कर रहे हैं। विद्यालय की सूरत बदलने के लिए बीडीओ ने जिस विद्यालय को गोद लिया है। उस विद्यालय तक जाने के लिए रास्ता तक नहीं है। बच्चों को कीचड़ से गुजर कर विद्यालय तक जाना पड़ता है। हम बात कर रहे हैं खेसरहा के बनकटा गांव के प्राथमिक विद्यालय की, जिसे खुद बीडीओ ने गोद ले रखा था। विद्यालय की स्थिति को देख यह प्रतीत हो रहा है कि गोद लेने के बाद से बीडीओ विद्यालय को देखने तक नहीं गए। विद्यालय की तस्वीर और तकदीर बदलने की बात तो अलग ही है।
क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय को दो वर्ष पूर्व खेसरहा के बीडीओ ने गोद लिया था, लेकिन इतने अरसे बाद भी विद्यालय की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। तेलौरा सेखुई मार्ग से पूरब एवं गांव से उत्तर इस विद्यालय की दूरी लगभग 250 मीटर दूर है। विद्यालय में दो शिक्षामित्र व दो अध्यापक सहित कुल चार शिक्षक कार्यरत हैं। छात्रों का कुल पंजीकरण 80 है। बड़े-बड़े वृक्षों के नीचे स्थित इस विद्यालय में जहां साफ-सफाई का अभाव है। वहीं, गांव से स्कूल तक आने-जाने वाला मार्ग कीचड़ से सना है। जिसके चलते यहां के बच्चे कीचड़ भरे मार्ग से आने-जाने पर विवश हैं। प्रधानाध्यापक धनुषधारी पांडेय का कहना है गांव से आने वाला मार्ग इतना जर्जर है कि बरसात के मौसम में यहां के छोटे-छोटे बच्चे विद्यालय में आने से कतराते हैं। ग्राम प्रधान को इसकी जानकारी देकर मार्ग ठीक कराने की मांग कई बार की गई, लेकिन विवाद होने की बात कह कर प्रधान पल्ला झाड़ रहे हैं। प्रधान अब्दुल हक ने बताया कि विवाद के कारण सड़क का निर्माण नहीं हो रहा है।