सिद्धार्थनगर। सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद 15 जून से बंद हो गई है। विभाग का दावा है कि इस बार लक्ष्य के सापेक्ष 130 प्रतिशत खरीद हुई है अर्थात लक्ष्य से 30 फीसदी खरीद अधिक हुई। इससे इतर तमाम किसान आज भी गेहूं बिक्री के लिए भटक रहे हैं। ये ऐसे किसान हैं कि पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन कराने के बाद भी क्रय केंद्रों पर उनका गेहूं खरीदा नहीं जा सका। ऐसे में किसान सरकारी खरीद व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब ज्यादातर किसानों से गेहूं खरीदा ही नहीं गया तो फिर लक्ष्य कैसे पूरा हुआ।
नई खरीद नीति के साथ जिले में 118 केंद्रों पर गेहूं की खरीद एक अप्रैल से शुरू हुई थी। प्रक्रिया में पारदर्शिता के मद्देनजर ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया अपनाई गई। खरीद तिथि बीतने के बाद सरकारी आंकड़ों के अनुसार लक्ष्य 67900 मीट्रिक टन था। बिक्री के लिए पंजीकृत 15409 किसानों से 88,275 मीट्रिक टन खरीद की गई। इसका औसत 57.28 क्विंटल प्रति किसान आया। जबकि कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 78 प्रतिशत किसान एक हेक्टेयर से कम जोत वाले हैं। इनके उपज की क्षमता 12 से 30 क्विंटल है तो इतनी खरीद कैसे हो गई। यह सरकार व विभाग के पारदर्शी खरीद व्यवस्था में गड़बड़ी के तरफ इसारा कर रहा है। अगर जांच हो तो सारे तथ्य खुलकर सामने आए जाएंगे। विभागीय जानकारों की माने तो सरकार ने पूरे प्रदेश में प्रति किसान 51 क्विंटल खरीद औसत मानी गई थी। मगर जिले मेें 57.28 क्विंटल खरीद हुई है।
अप्रैल में कराया पंजीकरण, फिर भी नहीं बिका गेहूं
उस्का ब्लॉक के महुलानी गांव के शिवपूजन ने बताया कि 20 अप्रैल को पंजीकरण कराया। ये तीन केंद्रों पर घूमते पर गेहूं की खरीद नहीं हुई। इसी गांव की गुलाबा ने भी कुछ ऐसा ही कहा। शोहरतगढ़ तहसील के डोहरिया निवासी प्रेम प्रकाश चौधरी ने 11 अप्रैल को 50 क्विंटल गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया था। खरीद तिथि बीत जाने के बाद भी इनका गेहूं नहीं खरीदा गया। इसी गांव के 15 से अधिक किसानों की भी यही व्यथा है। ऐसे में कहीं न कहीं खरीद प्रक्रिया गड़बड़ी की ओर इशारा कर रही है।
जिले में सात प्रतिशत ही बड़े किसान
जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि जिले में सात प्रतिशत ही ऐसे किसान हैं, जो दो हेक्टेयर या इससे अधिक रकबे वाले किसान हैं। इनकी औसत उपज 40-100 क्विंटल के बीच है। वहीं, 15 प्रतिशत किसान एक से दो हेक्टेयर की जोत वाले हैं। बाकी 78 प्रतिशत किसान न्यूनतम पांच और अधिकतम 30 क्विंटल उत्पादन करते हैं।
खरीद प्रक्रिया की जांच हो
अधिकांश किसान क्रय केंद्रों को चक्कर लगाते रहे, लेकिन उनका गेहूं नहीं खरीदा गया है। बिचौलियों से खरीदकर लक्ष्य पूरा कर लिया गया है, जो गलत है। इसकी जांच कराई जानी चाहिए।
- यार मोहम्मद चौधरी जिलाध्यक्ष भाकियू
100 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन लेकर हुई खरीद
बड़ी संख्या में किसान अभी अपना गेहूं नहीं बेच पाए हैं। उन्हें तारीख पर तारीख दी जाती रही। बिचौलियों से 100 रुपये क्विंटल कमीशन लेकर गोदाम को भर दिया गया। खरीद प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो भाकियू आंदोलन करेगा।
- कपिलदेव राय, राष्ट्रीय महासचिव भाकियू
अनियमितता की शिकायत मिली तो होगी जांच
गेहूं खरीद के लिए शासन की ओर से नामित नोडल अधिकारी एडीएम प्रमोद शंकर शुक्ला ने बताया कि खरीद में पारदर्शिता बरती गई है। अगर अनियमितता की शिकायत आती है जांच कराई जाएगी।