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बिजली समस्या बरकरार, सड़क पर गड्ढो की भरमार

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सिद्धार्थनगर। योगी सरकार के छह माह पूरे हो गए हैं। सत्ता संभालते ही सरकार ने एक नया विजन पेश किया था। भय, भूख और भ्रष्टाचार से कराहते उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए कई घोषणाएं कीं। गड्ढामुक्त सड़क अभियान चलाया, कटौती मुक्त विद्युत आपूर्ति के दावे किए। युवाओं को रोजगार, किसानों की कर्ज माफी, व्यापारियों को सुरक्षा और आम आदमी को साफ-स्वच्छ प्रशासन के सपने दिखाए। कई नई योजनाएं शुरू हुई तो कुछ पाइप लाइन में है। सरकार अपने प्रदर्शन पर पीठ थपथपाने में पीछे नहीं, मगर जनता के नजरिए में छमाही इम्तेहान का रिपोर्ट कार्ड अभी संतोषजनक नहीं है। लोग सरकार की कई कवायदों से खुश हुए हैं। लेकिन अभी भी व्यापक सुधार की जरूरत बता रहे हैं। उनकी मानें तो सरकारी दफ्तरों की कार्य संस्कृति बदलने में सरकार को अभी कोई खास सफलता नहीं मिली है। पहले भी फाइल आगे नहीं बढ़ती थी और अब भी हर टेबल पर अटक जा रही है। शिकायतें लंबित हो रही हैं या फिर फर्जी रिपोर्ट लगाकर निस्तारण का आंकड़ा बढ़ाया जा रहा है। भ्रष्टाचार का खेल प्रत्यक्ष की बजाए अब परोक्ष हो गया है। सरकार के कामकाज पर समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया कुछ इस तरह से बयां की।
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वादे पर खरी नहीं सरकार
छह माह के कार्यकाल में सरकार एक भी वादे पर खरा नहीं उतरी है। चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा बिजली में सुधार का था। सरकार ने 24 घंटे बिजली का वादा किया था, जो अब 10-12 घंटे की आपूर्ति तक सिमट गया है। गड्ढामुक्त सड़क का वादा भी अधूरा है। मुख्यालय को जोड़ने वाली सभी सड़कें जर्जर और गड्ढे से पटी हुई हैं। -राजेश उपाध्याय, व्यापारी।

शुरूआत अच्छी, नतीजों में थोड़ा वक्त
भ्रष्टाचार मिटाने के लिए सरकार ने सार्थक पहल की है। योजनाओं में ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से पारदर्शिता आएगी। कई कल्याणकारी योजनाएं लागू हुई हैं। अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ी है। हालांकि अभी काफी सुधार की जरूरत है। सरकार को सिर्फ छह महीने हुए हैं। अच्छी शुरुआत हो चुकी है, परिणाम आने में एक वर्ष तो लगेगा ही। -कन्हैया पांडेय, अधिवक्ता।
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युवाओं को रोजगार का दावा झूठा
चुनावी रैलियों में सरकार ने नौजवानों का पलायन रोकने के लिए उन्हें रोजगार देने का वादा किया था। नए उद्योग शुरू करने, अरसे से बंद भर्तियां आरंभ करने का वादा किया था। छह माह में इस ओर अभी कोई पहल नहीं हुई है। काम के अभाव में युवा गैर प्रांतों में पलायन को मजबूर हो रहा है। रोजगार का वादा छलावा साबित हुआ है। -अमर श्रीवास्तव, युवा।

वादे के अनुरूप पूरी की कर्जमाफी
प्रदेश के किसान लगातार कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे थे। आपदाओं में फसल चौपट होने के बाद बैंकों से लिया कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया था। घोषणा पत्र में कर्जमाफी का वादा हुआ था, जिसे सरकार ने पूरा कर दिया। हालांकि अभी बहुत से किसान इसके लाभ से वंचित हैं। उम्मीद है कि सरकार अपनी कथनी के अनुरुप कार्य करेगी। -जटाशंकर लाल, किसान।

महिला सुरक्षा पुराने ढर्रे पर
महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार ने एंटी रोमियो स्क्वाड का गठन तो कर दिया, लेकिन काम-काज अभी भी पुराने ढर्रे पर है। सिर्फ नई-नई टीम बनाने से समस्या का समाधान नहीं होना है, कार्य संस्कृति में भी बदलाव जरूरी है। महिलाओं को आभास होना चाहिए कि घर के बाहर निकलने पर वह असुरक्षित नहीं हैं। -सोनम चौधरी, गृहिणी।

विकास की दिशा में कुछ नहीं
वर्षों से विकास के नाम पर छली जाती रही जनता को योगी सरकार से ढेरों उम्मीदे हैं। सत्ता संभालते ही सरकार ने इसकी प्रतिबद्धता भी जताई, मगर उसे पूरा करने के लिए अब तक कोई सार्थक प्रयास नहीं दिख रहा। न सड़कें गड्ढामुक्त हो सकीं, न बिजली मिल पा रही। कानून व्यवस्था में भी कोई खास सुधार नहीं हुआ। अफसर मनमाने जरूर हुए हैं। -संजय यादव, नागरिक।
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