विशेष फलदायक है यह महाशिवरात्रि
सोमवार को है महाशिवरात्रि, निशीथ काल में शिव उपासना का खास महत्व
अमर उजाला ब्यूरो
डुमरियागंज। इस साल चार मार्च सोमवार के दिन महाशिवरात्रि है। यह संयोग विशेष फलदायक माना जा रहा है। भगवान भोलेनाथ की पूजा प्रत्येक सोमवार को करने का विधान है। चूंकि सोमवार के दिन ही महाशिवरात्रि पड़ रही है इसलिए शिवभक्तों के लिए इस बार की महाशिवरात्रि खास है। निशीथ काल यानी आधी रात को शिवजी का पूजन करने से वह प्रसन्न होंगे और उपासक की मनोकामना पूरी होगी।
नगर के श्रीरामलीला मैदान स्थित शिवमंदिर के पुजारी पंडित राकेश शास्त्री ने बताया कि वैसे तो सुबह से रात तक भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की जा सकती है। खास मुहूर्त में पूजा करने वालों को निशीथ काल में मात्र 50 मिनट ही शुभ मुहूर्त मिलेगा। निशीथ काल में पूजा करने का महत्व होने के चलते रात्रि 12 बजकर आठ मिनट से रात्रि 12 बजकर 57 मिनट तक पूजा करना श्रेष्ठ होगा। व्रत करने वाले भक्त पांच मार्च को सुबह 6.43 से दोपहर 3.30 बजे तक पारण कर सकते हैं।
शिवलिंग का प्रादुर्भाव और शिव-पार्वती विवाह की मान्यता
शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष में त्रयोदशी, चतुर्दशी व अमावस्या में महाशिवरात्रि मनाए जाने का विधान है। इस दिन को शिवलिंग के प्रादुर्भाव और शिव-पार्वती विवाह के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि प्रदोष व्यापिनी चतुर्दशी तिथि को रात्रि के समय शिवजी का पूजन करना अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है। इस मान्यता के चलते आधी रात महाशिवरात्रि धूमधाम से मनाई जाएगी। सुबह से लेकर रात तक श्रद्धालु शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा व जल अर्पण करके मनोवांछित फल की कामना करेंगे।
मांगलिक दोष दूर होंगे
मान्यता के अनुसार इस दिन सूर्य और चंद्रमा अत्यंत निकट होते हैं और शिवजी की पूजा करने से आत्मिक शांति और मन व भावनाओं से संबंधित पीड़ा का नाश होता है। महाशिवरात्रि पर शिव मंदिर में शिवलिंग की पूजा करने व जल अर्पित करने से मांगलिक दोष दूर होते हैं और बिगड़े कार्य पूर्ण होने लगते हैं। गन्ने के रस, पंचामृत से अभिषेक करें। शिवजी का गन्ने के रस व पंचामृत दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से अभिषेक करने पर तंगी दूर होकर आर्थिक उन्नति होगी। भावनात्मक कष्टों, वैवाहिक परेशानियों और पारिवारिक असंतोष से मुक्ति मिलेगी।
बेरोजगारों को मिलेंगे नौकरी के अवसर
ज्योतिषाचार्य पंडित ओमप्रकाश पांडेय के अनुसार ग्रह संयोगों के चलते इस बार की महाशिवरात्रि वृषभ, धनु, तुला और मिथुन राशि के जातकों के लिए शुभ संकेत लेकर आ रही है। बेरोजगार युवाओं के लिए नौकरी के नए अवसर मिलेंगे। उक्त राशि वालों को धन लाभ होगा, जो कार्य बरसों से रुके पड़े हैं वे सफल होंगे।
फोटो कैप्सन-02एसडीएन84पी व 85पी-भटगवां स्थित प्राचीन पंचमुखी शिवलिंग व शिवमंदिर
महाशिवरात्रि पर सजने लगे शिवमंदिर
सोमवार के दिन महाशिवरात्रि के होने से रविवार की रात 12 बजे के बाद से ही खुलेंगे कपाट
अमर उजाला ब्यूरो
डुमरियागंज। काफी अरसे बाद महादेव का पावन पर्व महाशिवरात्रि सोमवार को पड़ रहा है। क्षेत्र में स्थिति प्राचीन शिवमंदिरों पर भी पर्व को लेकर तैयारी अंतिम दौर में है। मंदिर और शिवालयों का रंगरोगन का काम भी जोरों पर है। इस बार भटगंवा स्थित प्राचीन शिवमंदिर पर विधायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह रुद्राभिषेक करेंगे।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के भटगंवा गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास करीब 250 साल पुराना है। मंदिर की देखरेख करने वाली शिवमंदिर जीर्णोद्धार समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि पहले यहां थारू जनजाति के लोग निवास करते थे जो धार्मिक स्वभाव के थे। उन्हीं के समय में सम्वत 2052 में इस मंदिर की स्थापना की गई थी। मंदिर में विशेष पंचमुखी शिवलिंग की स्थापना है। लोगों का मानना है कि इस मंदिर में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से लोगों की मनोकामना पूर्ति होती है। इस बार सोमवार को पड़ रहे शिवरात्रि पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह है। भटगंवा, भारतभारी, धनोहरी, देईपार और बेंवा शिवमंदिरों पर मेले का भी आयोजन किया गया है।
श्रीरामचरित मानस पाठ आज
डुमरियागंज। नगर के श्रीरामलीला मैदान में स्थित शिवमंदिर में रविवार की सुबह से श्रीराम चरित मानस पाठ का शुभारंभ किया जाएगा। इसका समापन सोमवार को हवन-पूजन व भंडारे के साथ होगा। यह जानकारी मंदिर के पुजारी पंडित राकेश शास्त्री ने दी।
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श्रद्धाभाव से निकली परमात्मा शिव की शोभायात्रा
शिवरात्रि पर ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से हुआ आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय भीमापार के तत्वावधान में शनिवार को श्रद्धाभाव से शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान निराकार परमपिता परमात्मा शिव का उल्लेख किया गया जिससे शिवरात्रि के महत्व को लोग समझ सकें।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय भीमापार के आह्वान पर शहर के बांसी तिराहा से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा शहर से अशोक मार्ग से गुजरी और संस्था कार्यालय पर पहुंचकर संपन्न हो गई। शिव अवतरण का आधार भी लोगों को बताया गया। बताया गया कि अध्यात्मिक अर्थ में रात्रि शब्द घोर कलियुग का प्रतीक है। आज संसार में चारों और चिंता, भय व निराशा का वातावरण है। मनुष्य विकारों की अग्नि में तप रहे हैं। प्राणी मात्र पर दुखों और प्राकृतिक आपदाओं का पहाड़ टूट रहा है। इसी समय परमात्मा शिव एक साधारण तन में अवतरित होकर नई सृष्टि स्थापना का कार्य कर रहे हैं। शोभायात्रा में मीना, मंजू, राम तीरथ, दीनानाथ, विद्या सागर, राज किशोर, गुंजन आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।