सिद्धार्थनगर। ‘जो उलझ कर रह गई है फाइलों की जाल में, गांव तक रोशनी आएगी कितने साल में’ आदम गोंडवी की यह कविता शहर के सीमा विस्तार पर सटीक बैठती है। 28 साल पहले जहां शहर खड़ा था। आज भी वहीं है। बदली है तो सिर्फ शहर की इमारतें और आबादी। लेकिन रकबा वहीं का वहीं है। वजह मुख्यालय स्थित नगर पालिका परिषद की सीमा विस्तार की फाइल 15 साल शासन से लौट आ रही है। इसके पीछे शहर के कुछ लोग जनप्रतिनिधियों को दोषी मान रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि केवल राजनीति के तहत सीमा विस्तार नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि आसपास के गांवों का भी विकास नहीं हो पा रहा है।
29 दिसंबर 1988 को जनपद के उद्घाटन अवसर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी की घोषणा के मुताबिक टाउन एरिया तेतरी बाजार को जनवरी 1990 में नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर का दर्जा मिला। इसके बाद 10 वार्डों से संख्या बढ़ाकर 25 कर दी गई। क्षेत्रफल का विस्तार न होने से विकास की गति 28 साल पहले की ही तरह है। लगभग 15 वर्ष पूर्व चेयरमैन घनश्याम जायसवाल से शुरू हुई पहल अब तक मूर्त रूप नहीं ले सकी। सीमा विस्तार को रफ्तार देने की ठोस व सकारात्मक पहल निवर्तमान चेयरमैन मो. जमील सिद्दीकी ने की। उन्होंने पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले 27 ग्राम सभाओं को शामिल करते हुए पहल शुरू की। शासन स्तर से संपूर्ण प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिलाधिकारी के स्तर पर मांगी गई आपत्ति में सिर्फ दो दिन शेष रह गए। इस बीच आपत्ति पड़ जाने के साथ ही उनका कार्यकाल समाप्ति की ओर था। लिहाजा पत्रावली शासन-प्रशासन के बीच उलझकर रह गई। चेयरमैन मो. जमील सिद्दीकी ने बताया कि अंतिम प्रक्रिया तक पहुंचाने का कार्य किया, पर उसी समय कार्यकाल खत्म होने को थे। लिहाजा आगे पैरवी नहीं हो सकी। इसके बाद सरकार बदल गई। नपा अध्यक्ष श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि सीमा विस्तार कराना उनकी प्राथमिकताओं में है। जल्द ही जनप्रतिनिधियों के सहयोग से मूर्त रूप देने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे।
विस्तार में शामिल थी ये ग्राम पंचायतें
नपा सिद्धार्थनगर के सीमा विस्तार में जिन ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया था, उनमें पिपरा पांडेय, सनई खुर्द, साड़ी, मधुकरपुर, महनगा, दतरंगवा, रोवापार, परसा महापात्र, मुड़िला, विनैका, जगदीशुपर, थरौली, बर्डपुर नंबर-14, रेहरा शामिल थे।
गांवों में निवास कर रहे डीएम-एसपी
जनपद बनने के 29 वर्षों बाद भी जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, एडीएम, एएसपी समेत एक दर्जन आला अफसरों का कार्यालय, निवास आज भी ग्राम पंचायतों में ही है। अधिकारियों का रौब होने के कारण आसपास भले ही सुविधाएं मुहैया हो गई हो पर पड़ोस के गांवों में विकास का पहिया थम गया है।