सिद्धार्थनगर। पांच महानगरों में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने के विरोध विद्युत अधिकारियों-कर्मचारियों का आंदोलन मंगलवार को तेज हो गया। कार्यालय में तालाबंद कर अधिकारियों-कर्मचारियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय परिसर में धरना देकर कार्य बहिष्कार किया। चेतावनी दी कि अगर सरकार निजीकरण का फैसला वापस नहीं लेती तो आंदोलन उग्र होगा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले धरने में राज्य कर्मचारी संघ, डिप्लोमा कर्मचारी संघ के सदस्य भी शामिल हुआ। सरकार के फैसले को कर्मचारी विरोधी करार दिया। कर्मचारियों की प्रोन्नति सहित अन्य सुविधाएं बंद हो जाएगी। नुकसान सिर्फ कर्मचारियों का ही नहीं होगा, बल्कि इसी आपूर्ति के लिए जनता को भी महंगे मूल्य देना होगा।
धरने में अधीक्षण अभियंता एसके श्रीवास्तव, एक्सईएन पीएन प्रसाद, संतोष त्रिपाठी, हरिश्चंद्र राम, एई सुरेंद्र कुमार, आशुतोष अग्रहरि, केएन पांडेय, बद्री विशाल मिश्र, अखिलेश्वर प्रसाद, दीपक सिंह, जेई विनय कुमार, सुरेंद्र कुमार, चंद्रशेखर आजाद, इंद्रेश बहादुर, नित्यानंद ओझा, विकास कुमार, लालजी राम त्रिपाठी, पंकज कुमार विश्वकर्मा, राजीव सिंह, अनिल कुमार यादव, गनेश मिश्र, रामायन प्रसाद, रविकांत, विनय कुशवाहा, अभिषेक, राधेश्याम गुप्ता, अरुण द्विवेदी आदि शामिल रहे।