वाटर सप्लाई पाइप बाद ठीक करते नगर पालिका के कर्मचारी।
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सिद्धार्थनगर। गर्मी व धूप की तपिश के बीच घरों में लगीं टोटियों से पानी गायब हैं। लिहाजा करीब चार मोहल्ले की 15 हजार से अधिक की आबादी 10 दिनों से बिना पानी के हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं। जबकि मामला शहर के सिसहनिया, शिवपुरी कॉलोनी व वन विभाग कॉलोनी और कांशीराम मोहल्ले का है। यहां के लोग मजबूरी में हैंडपंप से पानी ढोने को मजबूर है।
शहर के सिसहनिया, शिवपुरी कॉलोनी व वन विभाग कॉलोनी व कांशीराम मोहल्ले में पिछले 10 दिनों से लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। मोहल्ले की जलापूर्ति ठप होने से लोगों को सुबह नहाने से लेकर कपड़े धोने और खाना बनाने तक के लिए पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। लोग सुबह उठते ही पानी के लिए मोहल्ले में स्थित सरकारी हैंडपंपों से पानी के लिए निकल पड़ते हैं। इसके बाद भी जरूरत पड़ने पर घर की महिलाओं व बच्चों को पूरे दिन हैंडपंप से पानी ढोना पड़ता है। सिसहनिया निवासी विनय सिंह का कहना है कि 10 दिनों से जलापूर्ति बंद है। कई बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई पहल नहीं की गई है।
अनूप सिंह का कहना है कि विभागीय अधिकारियों से इस संबंध में कई बार पूछने के बाद भी उचित जवाब नहीं दे रहे हैं। कई दिनों से पानी की किल्लत से लोग जूझ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अनदेखी कर रहे हैं। इससे मोहल्ले महिलाओं व बच्चों तक को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि कांशीराम की रहने वाली सुशीला बताती हैं कि हम लोगों के नसीब में शुद्ध पानी नहीं है। यह समस्या नई नहीं है। जब से कांशीराम में आई, तब से पानी की किल्लत है। लेकिन कोई स्थायी हल आज तक नहीं निकल पाया।
कांशीराम आवास जाने वाली पाइप लाइन टूटी
सिसहनिया मोहल्ला स्थित वाटर हेड टैंक से कांशीराम आवास तक जाने वाला पाइप लाइन थरौली मंदिर के पास टूट गई थी। इस कारण 10 दिनों से पाइप लाइन का पानी सड़क किनारे नाले में बह रहा था। पानी की किल्लत से जूझ रहे लोगों की शिकायत के बाद नगर पालिका कर्मी शनिवार को किसी तरह ठीक करने का प्रयास कर रहे थे।
अभी कई दिनों तक पानी की किल्लत से जूझेंगे लोग
शिवपुरी कॉलोनी मोहल्ले में जलापूर्ति सिसहनिया मोहल्ला में स्थित वाटर हेड टैंक से होती है। जहां बोरिंग से पानी के साथ बालू निकल रहा है, इस कारण बोरिंग बंद होने से वाटर सप्लाई ठप हो गई है। नगर पालिका सिद्धार्थनगर के अधिशासी अधिकारी शैलेंद्र गुप्ता का कहना है कि बोरिंग खराब होने के बाद जलनिगम विभाग के तरफ से रिबोर कराने का इस्टीमेट बनाकर गोरखपुर भेजा गया है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद रिबोर कर समस्या का समाधान कराया जाएगा। इसमें कम से कम 15 दिन का समय लगेगा।