सिद्धार्थनगर। वेतन रोकने की कार्रवाई से नाराज जिले के सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के अधीक्षकों एवं प्रभारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उन्होंने चिकित्सकीय कार्य करते रहने का एलान किया है। प्रभारी चिकित्साधिकारियों के इस फैसले से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। गौरतलब है कि कार्य एवं दायित्व के प्रति शिथिलता के आरोप में जिलाधिकारी ने वेतन रोकने की कार्रवाई की है।
प्रभारी चिकित्साधिकारियों ने सोमवार को डीएम के नाम संबोधित पत्र जिलाधिकारी और सीएमओ कार्यालय में रिसीव कराया। इसमें उन्होंने सामूहिक इस्तीफे के साथ ही अपने खिलाफ हुई कार्रवाई का स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा है कि एचबीएनसी का कार्य आशा द्वारा किया जाता है। उनकी न्यूनतम शैक्षिक योग्यता कक्षा 8 है। इस वजह से समय-समय पर प्रशिक्षण के बावजूद उनके कार्य की गुणवत्ता में कमी रहती है। यूनीसेफ के मॉनीटर द्वारा ब्लॉक पर फीडबैक नहीं दिया जाता है। इनके कार्यों के अनुश्रवण के लिए बीसीपीएम व डीसीपीएम होते हैं। पर्यवेक्षकों की संख्या कम होने की वजह से भी गुणवत्ता प्रभावित होती है। प्रभारी चिकित्साधिकारियों के भी कई पद रिक्त हैं। 278 के सापेक्ष 195 नियमित एएनएम तैनात हैं। एक स्वास्थ्य केंद्र के दायरे की आबादी 5 हजार से बढ़कर 15 से 20 हजार हो गई है। इस वजह से भी गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
पत्र में कहा गया है कि सीमित संसाधन में दायित्वों का निर्वहन करने के बाद भी स्पष्टीकरण मांगे जाने से उनका मनोबल टूट गया है। वे अवसाद से ग्रस्त हैं और जुलाई का वेतन रोके जाने से वे खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। ऐसे में अब उनके लिए कार्य कर पाना अत्यंत कठिन है। इस वजह से 30 जुलाई सायं से सभी कार्यालयाध्यक्ष, अधीक्षक, प्रभारी चिकित्साधिकारी सामूहिक रूप से अपने पद से त्याग पत्र दे रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि वे जनसामान्य को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सकीय कार्य करते रहेंगे।
- प्रभारी चिकित्साधिकारियों द्वारा पत्र सौंपे जाने की जानकारी मिली है। इस मामले में बातचीत कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
- डॉ. आरके मिश्रा, मुख्य चिकित्साधिकारी
प्रभारी चिकित्साधिकारियों द्वारा सामूहिक त्यागपत्र दिए जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। संज्ञान में आने पर आवश्यक कदम उठाएंगे।
- कुणाल सिल्कू, जिलाधिकारी