सिद्धार्थनगर। अशोगवा-नगवां बांध टूटने से पिछले तीन दिनों से मैरुंड सतवाढ़ी और नवइला गांव में रविवार को एनडीआरएफ की टीम देवदूत बनकर पहुंची। एयरफोर्स के चॉपर से रेस्क्यू करते हुए टीम ने यहां से 84 लोगों को एयरलिफ्ट किया जिनमें एक वर्ष का बच्चा अंशू भी शामिल है। चौतरफा पानी से घिरे इस गांव के सैकड़ों लोग अब भी घरों की छतों पर शरण लिए हुए हैं। खुले आसमान के नीचे रह रहे इन ग्रामीणों के पास न तो शुद्ध पेयजल है और न ही भोजन। बाढ़ के रुके पानी से यहां के हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
शुक्रवार की सुबह बूढ़ी राप्ती के तेज दबाव से अशोगवा-नगवां बांध सतवाढ़ी के पास टूट गया था। चंद मिनटों में ही सतवाढ़ी और बगल का नवइला गांव सैलाब के पानी से घिर गया है। गांव के अधिकांश लोग बच्चों, पशुओं और जरूरी सामानों के साथ बंधे पर शरण लिए हुए हैं, जबकि दर्जनों परिवार ऊंचाई वाले घरों की छतों पर रुके हैं। एयरफोर्स के स्क्वाड्रन लीडर एन.मेहरोत्रा व सौरभ मिश्रा के साथ एनडीआरएफ के रमेश चौहान, पवन कुमार ने रविवार को सुबह साढ़े 6 बजे से गांव में रेस्क्यू शुरू किया। जवान पहले घरों की छतों पर उतरे और फिर एयरलिफ्ट करते हुए एक-एक कर लोगों को चॉपर तक पहुंचाया। करीब 84 लोगों को टीम ने गांव से निकालकर बुद्ध विद्यापीठ में बने राहत शिविर में पहुंचाया।
बाहर आए लालजी पाठक, परवेश चौधरी, दिलीप, तौलेश्वर, शालिनी, सचिन, महबूब, अनुराधा, सुमित्रा, शांति, मंजू आदि ने बताया कि 150 घरों की आबादी वाले इस गांव में अभी भी सैकड़ों लोग फंसे हुए हैं। उनके पास खाने-पीने के लिए भी कुछ नहीं बचा है। दिनेश का कहना था कि बांध टूटने के बाद बांसी तहसीलदार और लेखपाल मोटरबोट लेकर गांव के बाहर तक आए थे, लेकिन बिना कुछ किए ही लौट गए। ग्रामीण लगातार प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं, मगर कोई मदद नहीं मिल पा रही। सुशील, आशीष कुमार, साइना बानो, संतराम ने बताया कि गांव के पास 200 मीटर तक बांध कट गया है। समय रहते लोग घरों से भागते नहीं तो बड़ी तबाही होती। बताया कि खाने को कुछ नहीं बचा है। लोग बाढ़ का पानी पी रहे हैं। गांव में कई लोगों को बुखार है। स्वास्थ्य टीम तत्काल पहुंचाने की जरूरत है।
सोचा नहीं था कि पल भर में तबाह हो जाएगा सब कुछ
बाढ़ राहत शिविर में शरण लिए नवइला के बुजुर्ग वंशीधर यादव का कहना है कि इससे पहले 98, 88 और 82 में भी बाढ़ आई थी। तब गांव काफी नीचे था, फिर भी इतना पानी नहीं आया था। गांव ऊंचा होने के बाद भी इस बार बाढ़ ने उनका सब कुछ तबाह कर दिया। तिनका-तिनका जोड़कर संजोई गृहस्थी चौपट हो गई है। यह बाढ़ 98 से भी भयावह है। कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि ऐसी बाढ़ आएगी।
हेलीकॉप्टर की आवाज सुन बंध जा रही उम्मीद
राहत शिविर में शरण लिए लोगों के कई परिजन अब भी गांव में फंसे हुए हैं। हर बार हेलीकॉप्टर की आवाज के साथ लोगों को उम्मीद बंध रही है कि अब उनके प्रियजन भी बाहर आएंगे। रामबरन यादव ने बताया कि तीन दिनों से सभी लोग छत पर ही टिके हैं। प्रशासन को बार-बार फोन कर थक चुके हैं। आज सेना आई तो वह बाहर आ सके। गांव में फंसे परिवार के लोगों की चिंता बनी हुई है। कुछ ऐसी ही बेचैनी राज, संतोष सहित अन्य लोगों की भी है। 10वीं की छात्रा ममता ने बताया कि गांव में हाईस्कूल की आठ अन्य छात्राएं भी हैं। बाढ़ से जीवन तो बर्बाद हुआ ही, पढ़ाई भी बर्बाद हो गई है।
एक साल के बच्चे को गोद में उठाकर किया एयरलिफ्ट
एनडीआरएफ के जवानों की दिलेरी और हौसले ने सबको कायल कर दिया। जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बगैर बाढ़ में फंसे सैकड़ों लोगों को नई जिंदगी दी है। रविवार को रेस्क्यू के दौरान नवइला गांव से टीम के रमेश चौहान और पवन कुमार ने एक वर्ष के बच्चे अंशू को भी एयरलिफ्ट कर बाहर निकाला। बच्चे की मां सुमित्रा को पहले ही निकाल लिया गया था।