डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर)। शिया मुसलमानों के पहले इमाम हजरत अली के यौमे शहादत के मौके पर बुधवार की रात हल्लौर कस्बा स्थित मस्जिदों व इमामबाड़ों में मर्सिया मजलिस का आयोजन किया गया। इसमें जाकिरों ने हजरत अली की शहादत को बिस्तार से बयां किया, जिसे सुनकर अकीदतमंदों की आंखों से आंसू बहने लगे। इस दौरान अकीदतमंदों ने हाय अली-हाय अली की सदाएं बुलंद की। जामा मस्जिद में आमाल (विशेष नमाज) के बाद रात करीब 11 बजे मजलिस का आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत मर्सियाख्वानी से हुई। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना जमाल हैदर ने कहा कि हजरत अली को 19 रमजान की सुबह में कूफ स्थित मस्जिद में नमाज पढ़ाते समय अब्दुर्रहमान नामक एक व्यक्ति ने जहर बुझी तलवार से गर्दन पर वार कर जख्मी कर दिया था। दो दिन बाद 21 रमजान को उनकी शहादत हो गई थी। जिनकी याद में अकीदतमंद हर साल उन्नीस रमजान से लेकर इक्कीस रमजान तक लगातार तीन दिनों तक शहादत दिवस के रूप में मनाते हैं। मजलिस के बाद नफीस हल्लौरी व उनके हमनवां ने शेर ए खुदा ने सजदे में तलवार खाई है...दर्द भरा नौहा पढ़ा। इस पर अकीदतमंदों ने सीनाजनी किया। इसी क्रम में कस्बे में स्थित इमामबाड़ा कला, मस्जिद ए सानिए जेहरा सहित पूरे गांव में रात भर मर्सिया व मजलिस का आयोजन हुआ। बुधवार की रात से शुरू हुआ मर्सिया-मजलिस का सिलसिला लगातार तीन दिनों तक चलता रहेगा। इस दौरान मौलाना वसीम रजा जैदी, सबीह हैदर, काजिम मेंहदी, अजीम हैदर, मो. इमरान, शमसाद, नौशाद, अफरोज, अकबर मेंहदी, जानशीन अहमद, काजिम रजा, जमाल बीके, कामयाब बबलू, वजीर हैदर, महमूद रजा, जाबाज हैदर, अली कदर, हुसैन कदर, साहिल, अरमान, सलमान, फतेआब आदि मौजूद रहे।