मोहर्रम की दसवीं की रात हल्लौर मे आयोजित शामे गरीबा की मजलिस में मौजूद अकीदतमंदो का भारी हुजूम।
सिद्धार्थनगर। मानवता सम्राट हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों स्मृति के तौर पर मोहर्रम का 10 दिन शिया बहुल कस्बा हल्लौर में गम शोक के माहौल में बीतास मर्सिया मजलिस, नौहा मातम का सिलसिला शनिवार की रात भर चलता रहा। हर तरफ दास्ताने कर्बला को लेकर विलाप और क्रंदन के स्वर सुनाई दिया। जिसको सुनकर हर कोई गमगीन हो उठा। यह माहौल मोहर्रम की चांद रात से लेकर निरंतर दसवीं मोहर्रम शनिवार की रात तक बना रहा।
शिया बहुल कस्बा हल्लौर में मोहर्रम की चांद रात से लेकर छठवीं मोहर्रम तक मरसिया मजलिस का सिलसिला चलता रहा। वहीं सातवीं मोहर्रम से मातमी जुलूस निकलने का जो क्रम शुरू हुआ वह दसवीं मोहर्रम शनिवार तक चला। मातमी जुलूस में कस्बे की हजारों की आबादी नंगे पैर नंगे सर शामिल हुई और हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद कर हाथ और जंजीर कमा से खून से लथपथ होकर मातम किया। मोहर्रम का 10 दिन इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में बीता और हर तरफ हाय हुसैन, हाय कर्बला वालों की सदाएं फिजा में गूंजती रही। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग कार्यक्रम में मौजूद रहे और कर्बला के 72 शहीदों को याद किया।