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Siddharthnagar News: 10 करोड़ का होली का बाजार... अस्थायी दुकानों पर ‘नो गारंटी’ का खेल

Fri, 27 Feb 2026 01:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। “भइया, पक्का रंग है न? कल को खराब निकला तो आप मिलेंगे भी या नहीं?”...। शहर में एक ग्राहक का यह तीखा सवाल सिर्फ मोलभाव नहीं, बल्कि पूरे बाजार की हकीकत बयान करता है। दुकानदार मुस्कुराकर कहता है, “अरे कुछ नहीं होगा, ले जाइए।” ग्राहक पैसे देकर आगे बढ़ जाता है, लेकिन भरोसा वहीं अटका रह जाता है।
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जिले में करीब 10 करोड़ रुपये के अनुमानित कारोबार के साथ होली के बाजार की रौनक बढ़ गई है। सड़क से लेकर फुटपाथ तक रंग, गुलाल और पिचकारियों की अस्थायी दुकानें सजी हैं। भीड़ है, रौनक है, खरीदारी है, लेकिन त्योहार के बाद कई स्टॉल गायब हो जाते हैं या आज यहां कल वहां मिलते हैं। ऐसे में अगर सामान में खराबी निकली तो शिकायत का दरवाजा लगभग बंद सा हो जाता है। लोगों का कहना है कि होली के बाजार में सड़क किनारे लगी अस्थायी दुकानों से सामान सस्ते तो मिल जाते हैं, लेकिन खरीद में ‘नो गारंटी’ का जोखिम भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है।
जिले के मुख्यालय नौगढ़ ही नहीं, बांसी, इटवा, डुमरियागंज और शोहरतगढ़ सहित अन्य बाजारों में इस समय कदम रखने की जगह कम पड़ रही है। स्थायी दुकानों के बाहर तक रंग और गुलाल के पैकेट सजे हैं। सड़क किनारे टेंट लगाकर खोआ के साथ ही पिचकारियां, टोपी और गिफ्ट आइटम बेचे जा रहे हैं। ग्राहकों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। शहर के दुकानदार अखिलेश गुप्ता का कहना है कि होली उनके साल का सबसे बड़ा सीजन है। पिछले कुछ दिनों में बिक्री में तेजी आई है और आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की उम्मीद है। अस्थायी दुकानों की संख्या इस बार खास तौर पर ज्यादा दिख रही है। हर खाली जगह पर एक नया स्टॉल नजर आ रहा है।
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अस्थायी दुकानों से सुविधा लेकिन भरोसे की चुनौती
जानकारों का कहना है कि अस्थायी दुकानों ने ग्राहकों को हर जगह खरीदारी की सुविधा दी है। कम कीमत और आसान उपलब्धता के कारण लोग इनसे खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन यही अस्थायी व्यवस्था ग्राहकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी है। ये दुकानें सिर्फ कुछ दिनों के लिए लगती हैं और त्योहार खत्म होते ही हट जाती हैं। ऐसे में अगर खरीदा गया सामान खराब निकलता है, तो ग्राहक के पास विक्रेता तक पहुंचने का कोई तरीका नहीं होता। स्थायी दुकानों में कम से कम यह भरोसा रहता है कि जरूरत पड़ने पर दुकानदार से संपर्क किया जा सकता है, लेकिन अस्थायी स्टॉल के मामले में यह संभव नहीं होता।
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सैकड़ों लोगों को मिला अवसर
होली के इस बाजार ने जिले की अर्थव्यवस्था में नई हलचल पैदा की है। अनुमान है कि रंग, गुलाल, पिचकारी, मिठाई और गिफ्ट आइटम मिलाकर करीब 10 करोड़ रुपये का कारोबार होगा। मिठाई की दुकानों में अतिरिक्त कारीगर लगाए गए हैं। पैकिंग और बिक्री के लिए नए लोगों को काम मिला है। ग्रामीण क्षेत्रों से आए कई युवक अस्थायी स्टॉल लगाकर कमाई कर रहे हैं। यह बाजार सिर्फ व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के लिए आय का अवसर भी बन गया है।

सस्ता विकल्प आकर्षक, लेकिन जोखिम की अनदेखी
- वरिष्ठ नागरिक प्रेम शंकर तिवारी कहते हैं कि अस्थायी दुकानों पर सामान अक्सर सस्ता मिलता है। यही कारण है कि ग्राहक तेजी से इनकी ओर आकर्षित होते हैं, लेकिन कम कीमत के साथ गुणवत्ता को लेकर अनिश्चितता भी जुड़ी रहती है। कई बार उत्पाद की पैकेजिंग या स्रोत स्पष्ट नहीं होता। ग्राहक उत्साह में इन बातों पर ध्यान नहीं दे पाते। त्योहार खत्म होने के बाद अगर कोई समस्या सामने आती है, तो ग्राहक के पास शिकायत करने का कोई ठोस विकल्प नहीं बचता।
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बाजार बदल रहा, ग्राहक को भी बदलनी होगी सोच
- समाजशास्त्री डॉ. रघुवर पांडेय होली का बाजार अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा बड़ा और विविध हो गया है। विकल्प बढ़े हैं, सुविधा बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ग्राहक की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। खरीदारी करते समय यह देखना जरूरी है कि सामान कहां से लिया जा रहा है और उसकी गुणवत्ता कैसी है। विश्वसनीय दुकानों से खरीदारी करने पर जरूरत पड़ने पर संपर्क और समाधान की संभावना बनी रहती है।

रौनक के बीच छिपा सबक
- मनोविज्ञानी डॉ. सरिता का कहना है कि सिद्धार्थनगर का होली बाजार इस समय अपने पूरे रंग में है। सड़क तक फैली दुकानों और बढ़ती भीड़ ने त्योहार की जीवंत तस्वीर पेश की है। 10 करोड़ के अनुमानित कारोबार ने व्यापारियों और कामगारों को नई ऊर्जा दी है लेकिन इस चमक के बीच एक सच्चाई यह भी है कि हर दुकान समान भरोसा नहीं देती। अस्थायी दुकानों की सुविधा के साथ ‘नो गारंटी’ का जोखिम भी जुड़ा है। त्योहार की खुशी तभी पूरी होती है, जब खरीदारी के साथ भरोसा भी जुड़ा हो। इस होली, रंगों के साथ समझदारी भी चुनना जरूरी है।
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खरीदारी करते समय रखें ये सावधानियां
- स्थायी और लंबे समय से चल रही दुकानों को प्राथमिकता दें
- पैकेजिंग, निर्माण तिथि और निर्माता का नाम जरूर देखें
- बिना लेबल या खुले सामान से बचें
- मिठाई लेते समय ताजगी और रख-रखाव पर ध्यान दें
- अत्यधिक सस्ता सामान लेने से पहले गुणवत्ता सुनिश्चित करें

कोट...

- त्योहार को देखते हुए लगातार जांच अभियान चलाया जा रहा है। बिना लाइसेंस और मानक के विपरीत उत्पाद बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सैंपल फेल होने पर जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
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- आरएल यादव, सहायक आयुक्त (खाद्य)

- प्रशासनिक अधिकारी का वर्जन मिलेगा
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