श्रावस्ती। नेपाल के पहाड़ों सहित तराई के जंगलों में होने वाली बरसात से केन नाले का जलस्तर शनिवार और बढ़ गया है। इससे नाले के पानी का बहाव भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग पर तेज हो गया है। इससे चौपहिया व भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया है। ऐसे में राहगीर व साइकिल तथा मोटर साइकिल सवार स्थानीय लोगों के सहयोग से आ जा रहे हैं। मार्ग अवरुद्ध होने के 48 घंटे बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे।
जिले में भले ही शुक्रवार से बरसात न हुई हो, लेकिन नेपाल के पहाड़ों सहित उससे सटे जंगलों में रात में भी मूसलाधार बरसात हुई। जिससे पहाड़ी नालों का जल स्तर एक बार फिर बढ़ गया है। पहाड़ी नालों में बहाव तेज होने के कारण लोग नाला पार करने से कतरा रहे हैं। वहीं पहाड़ी नालों के किनारे बसे गांव व खेतों में कटान का खतरा भी बढ़ गया है। भिनगा जंगल के मध्य बहने वाले केन नाले का जलस्तर रात में और बढ़ गया।
ऐसे में भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग पर रेहली बिशुनपुर के निकट कटी सड़क पर पानी का बहाव तेज हो गया है। ऐसे में मार्ग पर चौपहिया व भारी वाहनों का आवागमन रुक गया है। ट्रैक्टर ट्रॉली व इक्का तांगा ही नाला पार कर रहे हैं। वहीं मार्ग पर आवागमन के संसाधनों का संचालन रुकने के कारण लोग साइकिल, मोटर साइकिल व पैदल ही आ जा रहे हैं। जिन्हें पानी के बहाव को पार करने के लिए स्थानीय लोगों का सहारा लेना पड़ रहा है।
वहीं केन नाले के बढ़े जलस्तर के कारण भिनगा जंगल में भी जल भराव की समस्या उत्पन्न हो गई है। यदि यही हाल रहा तो नाले का पानी भिनगा सिरसिया व भिनगा तेंदुआ रतनपुर मार्ग पर भी आ सकता है। यदि ऐसा हुआ तो सिरसिया विकास क्षेत्र का संपर्क जिले के अन्य हिस्सों से टूट सकता है। इन सबके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी न तो कटान स्थल पहुंचे और न ही आवागमन बहाल रखने के लिए कोई तैयारी की गई है।
राप्ती के घटते बढ़ते जलस्तर से दहशत में कछारवासी
नेपाल सहित पहाड़ों पर होने वाली बरसात के कारण राप्ती का जलस्तर कभी घट तो कभी बढ़ रहा है। नदी के घटते बढ़ते जलस्तर के कारण कछार के गांव व खेतों में कटान का खतरा भी बढ़ गया है। वहीं उमड़ घुमड़ रहे बादल को देख कछारवासियों की धड़कने तेज हो रही है। यदि नदी का जलस्तर बढ़ा तो कछार के करीब 72 गांव में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकता है। जिसको लेकर कछारवासी दहशत में देखे जा रहे हैं।