श्रावस्ती। नेपाल सहित पहाड़ों पर हुई बरसात के बाद राप्ती नदी का जलस्तर मामूली बढ़ गया था। जो अब घट चुका है। वहीं घटते जलस्तर के साथ नदी की लहरों ने अपने किनारों पर कटान तेज कर दिया है। इसके चलते कई बीघा कृषि भूमि कट कर नदी की धारा में विलीन हो रही है। इतना ही नहीं गिलौला के पुरैना गांव भी नदी के कटान के मुहाने पर आ गया है। ऐसे में ग्रामीण अपने हाथ अपना आशियाना उजाड़ रहे हैं।
तीन दिन पूर्व नेपाल सहित नेपाल के पहाड़ों पर मूसलाधार बरसात हुई थी। इसके बाद राप्ती नदी का जलस्तर करीब पांच सेंटीमीटर बढ़ गया था। जो अब घट चुका है। इस बीच घटते व बढ़ते जलस्तर के कारण नदी ने कटान तेज कर दी है। जिसकी चपेट में आने से गिलौला विकास क्षेत्र के ग्राम गौहनिया का मजरा पुरैना गांव नदी के कटान की जद में आ गया।
यहां राप्ती की लहरें कटान करते हुए गांव निवासी ठगई व प्रदीप के घर को अपनी धारा में विलीन करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में ग्रामीण स्वयं अपना आशियाना उजाड़ रहे हैं। इतना ही नहीं गांव मे नदी की लहरें गांव निवासी राम जी का 10 बीघा, सोनू का 7 बीघा, कृष्ण मित्र का 10 बीघा, रामदेव शुक्ला का 10 बीघा, रिंकू का 5 बीघा, सत्यमित्र शुक्ला का छह बीघा सहित करीब सौ बीघा कृषि भूमि फसल काट कर अपनी धारा में विलीन कर चुकी है। जिसे देख ग्रामीण व किसान परेशान हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में होने वाली कटान का यही हाल रहा तो न तो गांव का वजूद बचेगा और न ही ग्रामीणों के खेत ही। इसके बावजूद गांव व खेतों को कटान से बचाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया। वहीं इस बारे में अपर जिलाधिकारी योगानंद पांडे बताते हैं कि सभी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक व राजस्व लेखपालों को कटान पर पैनी नजर रखने का निर्देश डीएम द्वारा दिया जा चुका है। यदि ऐसा है तो तत्काल संबंधित लेखपाल, एसडीएम व तहसीलदार को मौके पर भेज कर इसकी जानकारी कराई जाएगी।