श्रावस्ती। सीमा विस्तार के बाद नगर पंचायत से नगर पालिका बनी भिनगा में आसपास के गांवों को शामिल किया गया था। इससे ग्रामीणों में भी चहुंमुखी विकास की उम्मीद जगी थी। जो पांच वर्ष बाद भी पूरी नहीं हो सकी। गांव को नगर का दर्जा मिलने के साथ ही ग्रामीणों से गांव स्तर पर मिलने वाली सुविधाएं भी छिन गईं। प्रधानमंत्री आवास व स्ट्रीट लाइट को दरकिनार कर दिया जाए तो लोग मूलभूत सुविधाओं को भी तरस रहे हैं।
नगर पंचायत भिनगा का सीमा विस्तार कर उसे नगर पालिका परिषद का दर्जा पूर्व सरकार में मिला था। तब इसमें ग्राम पंचायत टंड़वा बनकटवा, पूरेखैरी, लक्ष्मनपुर इटवरिया, आंशिक वर्गावर्गी, सिसवा, लबेदपुर, राजापुर को शामिल किया गया था। नगर सीमा में शामिल होने के साथ इन ग्राम पंचायतों व मजरों से गांव का दर्जा छिन गया। इसके साथ ही उन्हें ग्राम पंचायत स्तर पर मिलने वाली सुविधाएं भी रोक दी गईं। इतना ही नहीं गांव में तैनात सफाई कर्मियों को भी पंचायत राज विभाग द्वारा हटा लिया गया। तब से अब तक नगर सीमा में शामिल हुए गांव के लोग मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। यहां न तो इस दौरान कोई विकास कार्य हुआ और न ही नाली, सड़क व इंटरलॉकिंग का कार्य ही कराया गया। पूर्व में लगे खड़ंजे व नालियां भी बर्बाद हो गईं। जिनकी मरम्मत न होने के कारण लोग दुश्वारियां झेल रहे हैं।
माह में एक बार भी नहीं आते सफाईकर्मी
भिनगा के पटेल नगर निवासी विजय कुमार बताते हैं कि नगर मेें सफाई कर्मियों द्वारा गली मोहल्लों व मार्गों की सफाई नियमित की जा रही है। नगर सीमा में शामिल गांव में कभी कभार ही सफाई कर्मी दिखाई देते हैं। जिनके द्वारा मुख्य मार्ग की सफाई कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति ली जा रही है। यहां जलनिकासी की व्यवस्था न होने के कारण लोगों के घरों के सामने कीचड़ व जलभराव की समस्या बनी रहती है। कैलाश नाथ बताते हैं कि नगर सीमा में शामिल होने के बाद यह उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें भी सप्लाई का पानी मिलेगा। नियमित सफाई कर्मी आकर मार्गों की सफाई करेंगे। जलनिकासी के लिए मार्ग किनारे नालियों का निर्माण होगा। लेकिन यह सपना ही रह गया। ओम प्रकाश का कहना है कि नगर सीमा में शामिल होने से पहले ही ठीक था। कम से कम गांव स्तर की सुविधाएं तो मिल रहीं थीं। प्रधानमंत्री आवास व स्ट्रीट लाइटों को नजरअंदाज कर दिया जाए तो आज भी लगता है कि लोग गांव में ही रह रहे हैं। ऐसा ही कहना राम प्रताप का भी है जो पांच वर्ष बाद भी विकास न होने से आहत हैं।