श्रावस्ती/गिरंट बाजार। तराई से यूरिया संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। पांच दिनों से ज्यादातर समितियों से खाद का वितरण नहीं किया गया, इससे समस्या और विकट हो गई है। निजी विक्रेता ज्यादा मुनाफे के चक्कर में प्रति बोरी 100 से 150 रुपये अधिक ले रहे हैं, इससे किसानों की मुसीबत और बढ़ गई है।
यूरिया संकट से सबसे ज्यादा परेशानी गरीब किसानों को हो रही है। ये जहां ओवररेटिंग के चलते निजी दुकानों से खाद नहीं ले पा रहे हैं, तो वहीं समितियों पर लाइन लगाने के बाद भी उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है। खाद न मिलने से धान की फसल खराब होती जा रही है।
रविवार को खाद न होने से प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति हरदत्त नगर गिरंट पर ताला लटकता रहा और किसान भटकते नजर आए। सचिव आनंद प्रताप ने बताया कि मंगलवार तक यूरिया आने की संभावना है।
कहीं नहीं मिली खाद
लालपुरवा निवासी प्रवीण कुमार ने बताया कि पांच दिन से यूरिया के लिए चक्कर काट रहे हैं। निजी दुकान और समिति, कहीं भी खाद नहीं मिली, इससे फसल खराब हो रही है।
खाद की डंपिंग पर लगे रोक
राडहनपुरवा निवासी किसान राम कुमार वर्मा ने बताया कि चार दिन से समिति के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन खाद नहीं मिल रही है। निजी दुकानदार भी ओवररेटिंग के लिए खाद डंप कर रहे हैं, मांगने पर मना कर देते हैं।
सरकार समस्या पर दे ध्यान
बलिदानपुरवा निवासी मोहन लाल गुप्ता ने बताया कि सरकारी समितियों ही नहीं, निजी दुकानों से भी खाद नदारद है। जहां निजी दुकानदार खाद देते भी हैं, तो 100 से 150 रुपये अधिक मांगते हैं। सरकार को चाहिए कि किसानों की समस्या पर ध्यान दे और खाद उपलब्ध करवाए।
आठ दिन से समिति पर दौड़ रहे
काशीपुरवा निवासी जगतराम यादव ने बताया कि आठ दिनों से खाद के लिए भटक रहे हैं, लेकिन यूरिया नहीं मिली। रविवार को भी पता करने आए हैं, लेकिन अब मंगलवार को बुलाया गया है।