हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने श्रावस्ती के एक मदरसे की ओर से दाखिल याचिका को, राज्य सरकार की ओर से यह कहे जाने पर कि मदरसे के ढांचे को न तो ढहाया गया है और न ही इसका ध्वस्तीकरण प्रस्तावित है, निस्तारित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अन्य याचिका पर पहले दिए गए आदेश के तहत सरकार अगर कोई निर्णय लेकर आदेश देती है तो इसकी जानकारी याची मदरसे को दी जाएगी।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश श्रावस्ती के मोहल्ला टंडवा स्थित मदरसा अंजुमन इस्लामिया अहले सुन्नत वलजमात की पुनर्विचार याचिका पर दिया। याची ने आशंका जताई थी कि मामले में दाखिल अन्य याचिका पर पहले दिए गए कोर्ट के आदेश की आड़ में सरकारी अमला प्रक्रिया का पालन किए बगैर निर्णय लेकर मदरसे के ढांचे को ढहा सकता है।
इस पर कोर्ट ने सरकारी वकील को सरकार से जानकारी लेकर इसी 21 अगस्त को पेश करने का निर्देश दिया था। इसके तहत मुख्य स्थाई अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने प्रांतीय खंड श्रावस्ती के पी डबल्यू डी के अधिशाषी अभियंता एवं भिनगा के एस डी एम से जानकारी लेकर कोर्ट को बताया कि मदरसे के ढांचे को नहीं ढहाया गया है और वहां कोई ध्वस्तीकरण अभी प्रस्तावित भी नहीं है। राज्य सरकार की ओर से किए गए इस कथन पर कोर्ट ने रिव्यू निस्तारित कर दी।