श्रावस्ती। जिले में सक्रिय क्षय रोगी खोज अभियान की रविवार को शुरुआत हो गई। जिसका शुभारंभ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भिनगा में भाजपा जिलाध्यक्ष व महामंत्री द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया।
भाजपा जिलाध्यक्ष संजय कैराती पटेल ने कहा कि लोग टीबी के लक्षणों को अनदेखा न करें। लक्षण दिखने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच कराएं। जांच में टीबी निकलने पर नियमित रूप से उपचार करें। अभियान की सफलता में टीम व कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका होती है। इस मौके पर उन्होंने आम जनमानस से सभी चिह्नित क्षेत्र में टीम के पहुंचने पर सहयोग करने की अपील करते हुए लक्षणों के बारे में पूरी जानकारी देने, यदि किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण हैं तो उसे न छिपाने व जांच कराने की अपील भी की। वहीं, जिला महामंत्री दिवाकर शुक्ल ने कहा कि टीबी की दवा पूरी तरह से नि:शुल्क है। जो सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है। ऐसे में लोग अभियान की सफलता के लिए आगे आएं। जिससे जिले को टीबी मुक्त बनाया जा सके।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश मातनहेलिया ने कहा कि टीबी का इलाज अधूरा छोड़ने पर गंभीर टीबी हो सकती है। जिसे एमडीआर एवं एक्सडीआर भी कहते हैं। टीबी नाखून और बाल को छोड़कर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। फेफड़े की टीबी संक्रामक होती है। जिससे बीमारी एक-दूसरे में फैलती है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एमएल वर्मा ने बताया कि ये अभियान सोमवार दो नवंबर से 11 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान भिनगा, भंगहा, मल्हीपुर एवं सिरसिया क्षेत्र के चिह्नित गांवों में टीम घर-घर भ्रमण करेगी। टीम द्वारा टीबी के लक्षणों के आधार पर स्क्रीनिंग की जाएगी।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. विनय वर्मा ने कहा कि टीबी की बेहतर जांच एवं उपचार सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर नि:शुल्क है। डॉ. संतोष वर्मा ने कहा कि सरकार की ओर से सभी टीबी मरीजों को उपचार के दौरान 500 रुपये प्रतिमाह पोषण सहायता प्रदान की जाती है। इस मौके पर डॉ. दीपक शुक्ल, संजू तिवारी, डीपीसी रवि कुमार मिश्र, सौरभ कटियार, बृजेश यादव, जेपी त्रिपाठी सहित टीम के सभी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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51 टीमें चिह्नित करेंगी मरीज
जिले की एक लाख 32 हजार की आबादी में टीबी रोगियों को खोजने का अभियान रविवार से शुरू हो गया। इसके लिए 51 टीमें गठित की गई हैं। प्रत्येक टीम में तीन सदस्य हैं। इनमें आशा, एएनम और स्वयंसेवकों को शामिल किया गया है। ये टीमें संभावित मरीजों के सैंपल लेकर जांच को भेजेंगी। जिनमें टीबी की पुष्टि होने के बाद उनका विधिवत उपचार किया जाएगा। इन टीमों की निगरानी के लिए 16 सुपरवाइजर भी तैनात किये गए हैं।
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ऐसे फैलता है टीबी
टीबी (क्षय रोग) एक घातक संक्रामक रोग है। ये माइक्रो बैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से होता है। टीबी (क्षय रोग) आमतौर पर फेफड़ों पर हमला करता है। मगर ये फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है। ये रोग हवा के माध्यम से फैलता है। जब क्षय रोग से ग्रसित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है तो उसके साथ संक्रामक ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई उत्पन्न होते हैं। जो कि हवा के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। ये ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई कई घंटे तक वातावरण में सक्रिय रहते हैं। जब एक स्वस्थ व्यक्ति हवा में घुले इन माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई के संपर्क में आता है तो वह इससे संक्रमित हो सकता है।
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ये हैं टीबी के लक्षण
लगातार तीन हफ्ते खांसी आना और आगे भी जारी रहना। खांसी के साथ खून आना। छाती में दर्द और सांस फूलना। वजन कम होना और ज्यादा थकान महसूस होना। शाम को बुखार आना और ठंड लगना तथा रात में पसीना आना टीबी का लक्षण है।