गंध कुटि पर प्रार्थना करते अनुयायी।
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भगवान बुकटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शुक्रवार को उपासकों से गुलजार रही। श्रीलंका से आए बौद्ध अनुयायियों ने गंध कुटि पर विशेष प्रार्थना की। इस दौरान उपासकों को बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने उपदेश भी दिया। उन्होंने उपासकों को भगवान बुद्ध का स्मरण कर उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करने को कहा।
बौद्ध तपोस्थली आए श्रीलंकाई अनुयायियों ने गंध कुटि पर विशेष पूजा की। इस दौरान बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने कहा कि भगवान बुद्ध के अनुसार पवित्र जीवन बिताने के लिए मनुष्य को दोनों प्रकार की अति से बचना चाहिए। न तो उसे उग्र तप करना चाहिए और न ही सांसारिक सुखों में ही लगे रहना चाहिए। उन्होंने मध्यम मार्ग के महत्व पर बल दिया है। बुद्ध ने ईश्वर और आत्मा दोनों को नहीं माना। वह हमेशा अपने शिष्यों से कहा करते थे कि उन्होंने किसी नए धर्म की स्थापना नहीं की है। यह वही धर्म है जो हमेशा से चला आ रहा है। उन्होंने अपने विचार लोगों को अपनी ही भाषा (प्राकृत) में समझाया।
महात्मा बुद्ध ने बौद्ध संघों की स्थापना की, जिसमें सभी जातियों के पुरुष एवं महिलाओं को प्रवेश दिया गया। बौद्ध संघ बहुत ही अनुशासनबद्ध और जनतांत्रिक संगठन था। बौद्ध धर्म की शिक्षाओं को तीन ग्रंथों में एकत्र किया गया है। जिन्हें त्रिपिटक कहते हैं। बुद्ध ने जात पात, ऊंच नीच के भेदभाव तथा धार्मिक जटिलता को गलत बताया है। आइये हम भगवान बुद्ध का स्मरण कर उनके दिखाए मार्ग पर चलने का प्रयास करें। इस मौके पर उपासकों ने तपोस्थली के विभिन्न मूमेंटों का भ्रमण कर माथा टेका। मौके पर बौद्ध भिक्षु आनंद सागर, धम्म सागर, नाग सागर सहित काफी संख्या में बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे।