गंधकुटी में पूजा करते श्रीलंका के अनुयायी।- संवाद
कटरा। श्रीलंका के अनुयायियों का 40 सदस्यीय दल बृहस्पतिवार को बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। सभी ने बौद्ध भिक्षु सुमेधा थेरो के नेतृत्व में पारंपरिक ढंग से गंध कुटी पर पूजा-अर्चना की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु सुमेधा थेरो ने कहा कि बौद्ध दर्शन के दो प्रमुख सिद्धांत हैं। पहला सिद्धांत यह है कि संसार में होने वाले दुख का निवारण करने के उपाय खोजना और उन पर आचरण करना है।
बताया कि दुख निवारण चार आर्य सत्यों को जान लेने से संभव हो जाता है। संसार में दुख है और इस दुख का कारण भी है। दुख का कारण दूर करने से दुख दूर किया जा सकता है और मध्यम मार्ग पर आचरण करने से दुख दूर होता है।
बौद्ध दर्शन की दूसरी शिक्षा माध्यमिक मार्ग है। इसका अर्थ किसी भी वस्तु या प्रवृत्ति में संतुलन बनाए रखना है। संतुलन की अवस्था को आचरण का माध्यमिक मार्ग कहा गया है। बौद्ध दर्शन सम्यक आचरण पर बल देता है, जिसके आठ अंग हैं। इनमें सम्यक ज्ञान, सम्यक विचार, सम्यक आचरण और सम्यक समाधि प्रमुख हैं।