बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में श्रीलंका मंदिर की परिक्रमा करते अनुयायी।- संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शुक्रवार को श्रीलंका से आए अनुयायियों के 118 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने भिक्षु दीपालोक महाथेरो के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से जेतवन परिसर की परिक्रमा की। इसके बाद गंध कुटी पर मशाल पूजा की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने कहा कि सच्चा ज्ञान संसार के दुखों का निवारण खोजना और उन पर आचरण करना है। अध्यात्म दुख दूर नहीं करता, बल्कि यह जानकारी देता है कि हर वस्तु परिवर्तनशील है।
उन्होंने आगे बताया कि दुख निवारण चार सत्यों को जान लेने से संभव है। संसार में दुख है, दुख का कारण है, दुख का कारण दूर करने से दुख दूर होता और मध्यम मार्ग पर आचरण से दुख दूर होता है।
भिक्षु ने आगे बताया कि माध्यमिक मार्ग का अभिप्राय है कि किसी भी वस्तु का न तो आधिक्य होना चाहिए और न ही कमी होनी चाहिए। बौद्ध दर्शन सम्यक आचरण पर बल देता है, जिसके आठ अंग हैं।