बोधि वृक्ष की पूजा करते अनुयायी।- संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार को थाईलैंड से आए अनुयायियों के 30 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में बोधि वृक्ष की पारंपरिक ढंग से पूजा-अर्चना की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि राजा शुद्धोधन अपने बेटे गौतम बुद्ध के संन्यासी बनने की भविष्यवाणी को लेकर काफी चिंतित थे। उन्होंने घर में ही सभी प्रकार की सुख-सुविधाओं व विलासिता की वस्तुओं का प्रबंध करवाया, ताकि बुद्ध को मानवीय कष्ट न हो।
यहां तक कि बुद्ध को महल के बाहर किसी से भी संपर्क करने की अनुमति नहीं थी। बावजूद इसके बुद्ध महल के बाहर क्या हो रहा है, यह देखने के लिए उत्सुक थे। काफी प्रयास के बाद एक दिन उन्हें सारथी चन्ना के साथ महल से बाहर जाने की अनुमति अपने पिता से मिल गई।
राजा शुद्धोधन ने उनके मार्ग से वृद्ध और बीमार लोगों को हटवा दिया, ताकि राजकुमार केवल युवा, स्वस्थ और प्रसन्न लोगों को ही देख सकें। हालांकि बुद्ध ने पहली यात्रा में ही कमजोर व दुर्बल वृद्ध को देख लिया। दूसरी यात्रा में एक बीमार व्यक्ति व शव को देखा। अंत में उन्हें पीले वस्त्र पहने हुए एक साधु भी दिखे, जिनके बारे में सारथी चन्ना ने उन्हें समझाया।
सभा के बाद सभी अनुयायियों ने बौद्ध तपोस्थली का भ्रमण किया।