बहराइच। कतर्नियाघाट में बाघों का कुनबा फल-फूल रहा है। वन विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार कतर्निया की आबोहवा बाघों को रास आ रही है। वर्तमान में करीब 100 किलोमीटर के परिक्षेत्र में 29 बाघों के होने की पुष्टि हो चुकी है। इसके और भी बढ़ने की उम्मीद वन विभाग के अफसर जता रहे हैं। इससे पूर्व 2015 में हुई गणना में क्षेत्र में बाघों की संख्या 16 थी।
विश्व टाइगर डे पर बाघों की गणना रिपोर्ट भारत सरकार से जारी होने के बाद विभिन्न संरक्षित इलाकों में अपने क्षेत्रों में बाघों की संख्या जानने के लिए बेचैनी बढ़ गई थी। चूंकि कैमरा ट्रैपिंग एवं अन्य अभ्यास टाइगर रिजर्व के अधिकारियों व फील्ड स्टाफ की ओर से डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के तकनीकी सहयोग से किया गया था, परंतुु फील्ड से प्राप्त आंकड़ों का आंकलन करने का कार्य भारतीय वन्यजीव संस्थान को करना था, जिसमें पिछले वर्ष कुछ कार्य बाकी रह जाने के कारण क्षेत्रवार रिपोर्ट नहीं प्रदर्शित की जा सकी थी।
इस बार वैज्ञानिकों की ओर से विश्व बाघ दिवस के अवसर पर क्षेत्रवार रिपोर्ट जारी कर दी गयी है। प्रभागीय वनाधिकारी व वन संरक्षक जीपी सिंह ने बताया कि भारतीय वन्य जीव संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में 29 बाघों की पुष्टि हुई है, जोकि विगत वर्षों में हुई बाघ गणना में सर्वाधिक संख्या है। उन्होंने कहा कि विगत वर्षों में बाघों की सुरक्षा में तैनात स्टाफ तकनीक का सहारा लेकर एम स्ट्राइप विधि से पेट्रोलिंग कर रहा है एवं विभिन्न एजेंसियों जैसे एसएसबी, पुलिस व एसटीपीएफ के बेहतर समन्वय से बाघों के शिकारियों पर अंकुश लगा पाने में सक्षम हुए हैं।
बाघों के बारे में स्थानीय समुदाय की जागरूकता, मीडिया की संवेदनशीलता, बाघ संरक्षण से जुड़े संस्थाओं की सहायता एवं सरकार की प्रतिबद्धता के कारण यह संभव हो सका है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि वर्ष 2018 में आल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन के दौरान कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के 550 वर्ग किमी के जंगलों के प्रत्येक बीट को यूनिट बनाया गया था। पहले बाघों की उपस्थिति का आकलन साइन सर्वे, वनस्पति, छोटे एवं बड़े शाकाहारी वन्य पशुओं, जंगलों में मवेशियों तथा मानव दखल का सर्वे भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार करने के बाद कुल 283 कैमरा स्टेशन बनाये गए थे।
आंकड़ों में कोई त्रुटि न हो, इसके लिये पूरे अभ्यास के दौरान तकनीकी उपकरणों का प्रयोग किया गया था। यह कार्रवाई डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञ एवं फील्ड निदेशक दुधवा टाईगर रिजर्व तथा प्रभागीय वनाधिकारी द्वारा भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिकों के दिशा निर्देशन में सफलतापूर्वक करायी गयी। भारत सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट में अन्य वन्य जीवों का घनत्व एवं उपस्थिति का आकलन भी किया गया है। दबीर हसन ने बताया कि कतर्नियाघाट में 29 बाघों की उपस्थिति है जो कि बहुत सुखद संकेत है।