पुरैनिया गांव में दीपक बनाता रघुपति प्रजापित
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श्रावस्ती। चीन निर्मित झालरोें की चमक बाजार में मंद पड़ गई है। उसके स्थान पर देशी झालरें बिक रही हैं। इस दीपावली में मिट्टी के दीपकों की मांग बढ़ी है। इसके चलते गांव व नगर के आसपास दीपक बनाने के लिए चॉक तेज हो गए हैं।
चीन निर्मित झालर अब बाजार से गायब हैं। मेक इन इंडिया झालरें बाजार में बिक रही हैं, लेकिन इसमें कई खामियां है। झालर बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला तार बहुत ही कमजोर है। जिसके चलते प्रत्येक झालर में 50 फीसदी बल्ब ही जल पाते हैं। यहां तक कि चार बंडल तार लिया जाए तो उसमें से दो बंडल खराब ही निकल जाते हैं। दीपावली जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे लोगों का रुझान मिट्टी के दीपकों की ओर बढ़ रहा है। इसके चलते ग्रामीण हो या नगर सब जगह दीपक बनाने के लिए चॉक तेज हो गया है।
नई-नई डिजाइन में बना रहे दीपक
परंपरागत तरीके से गोल दीपकाें की मांग व आपूर्ति बाजार में पहले से ही है, लेकिन इस बार कुम्हार इन मिट्टी के दीपकों को नया स्वरूप दे रहे हैं। सबसे आकर्षक मोर आकृति दी है। इसमें बाती रखने की जगह है। दीपकों का साइज भी कई तरह का है। यदि ज्यादा देर तक दीपक को जलाना है तो बड़े दीप बाजार में खरीदे जा सकते हैं। जिसमें अधिक तेल आने के कारण ज्यादा देर तक प्रकाश देगा। ऐसे ही रंग-बिरंगे दीपक हैं जो कुम्हारों ने रंग कर तैयार किए हैं।