तुलसीपुर। मल्हीपुर क्षेत्र के ग्राम कुंडा में बुधवार को ससुर व दामाद की अर्थी एक साथ उठी। अंतिम यात्रा में शामिल हर व्यक्ति की आंख नम थी। दर्दनाक सड़क हादसे में मृतकों के परिजनों का रो-रोकर हाल बेहाल है। हर कोई यही कह रहा था कि अब नवजात बच्चे का पालन पोषण कैसे होगा।
ग्राम कुंडा निवासी कलामुद्दीन (35) अपने ससुर बदल खां (55) का इलाज कराने के लिए बाइक से नानपारा जा रहे थे। बहराइच जिले के नवाबगंज क्षेत्र स्थित सिंधौरा चौराहे के निकट अचानक सामने आए वनरोज को बचाने के चक्कर में बाइक सड़क किनारे लगे बबूल के पेड़ से टकरा गई। हादसे में कलामुद्दीन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल बदल खां ने मेडिकल कॉलेज बहराइच ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। कलामुद्दीन मुंबई में मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते थे, लेकिन अब परिवार में कमाऊ सदस्य कोई नहीं बचा है। वहीं, मंगलवार की रात कलामुद्दीन की पत्नी सरीकुल निशा ने बाबागंज स्थित एक अस्पताल में बेटे को जन्म दिया है। ऐसे में जन्म लेते ही नवजात के सिर से पिता का साया उठ गया।
मां के कंधे पर सात बच्चों की जिम्मेदारी
कलामुद्दीन के परिवार में पहले से ही छह बच्चे हैं, जिनमें हसीमुन (13), अल्हाहुद्दीन (11), सहीमुन (9), सलीमन (7), सलामुद्दीन (5) शामिल हैं। वहीं, मंगलवार को जन्मा नवजात भी शामिल हो गया है। ऐसे में अब सात बच्चों की जिम्मेदारी अकेली मां के कंधों पर आ गई है।