श्रावस्ती। तराई में शनिवार रात से जारी बादलों की आवाजाही रविवार सुबह झमाझम बारिश में बदल गई। लगभग 10 बजे शुरू हुआ बारिश का सिलसिला रुक-रुक कर पूरे दिन जारी रहा। इससे धान की फसल को संजीवनी मिल गई, किसानों के चेहरे खिल उठे। हालांकि इस दौरान भिनगा-बहराइच हाईवे समेत कई स्थानों पर जलभराव से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
जुलाई में तराई में लगभग सूखे जैसी स्थिति रही, किसान महंगे डीजल पंप के सहारे फसल को बचाने में लगे रहे। अगस्त की शुरुआत के साथ ही तराई में सूखे का प्रकोप खत्म होने लगा, रविवार को झमाझम बारिश हुई। इससे धान की फसल लहलहा उठी, खेत में पड़ीं दरारें भर गईं।
किसान राजितराम ने बताया कि बारिश न होती तो धान की फसल बर्बाद हो जाती। किसान उमेश चंद्र ने बताया कि गन्ने की फसल के लिए भी बारिश काफी लाभदायक है। पंपिंग सेट से सिंचाई तो हो जाती है, लेकिन लागत बढ़ जाती है। बारिश होने से लोगों को चिलचिलाती धूप व उमस भरी गर्मी से भी राहत मिली।
हाईवे समेत जगह-जगह हुए जलभराव ने बढ़ाई दुश्वारी
बारिश ने जहां एक ओर गर्मी से निजात दिलाते हुए फसलों को नवजीवन दिया है, वहीं दूसरी ओर जगह-जगह जलभराव से दिक्कत भी हो रही है। भिनगा-बहराइच हाईवे पर रेहरापुरवा के पास भीषण जलभराव हुआ है। इससे हादसे का खतरा बढ़ गया है। बाइक व चार पहिया वाहन फिसल जा रहे हैं। यही नहीं, वाहनों के गुजरने से गंदे पानी की छीटों से बाइक व साइकिल सवारों के कपड़े भी खराब हो रहे हैं। इसी तरह तुलसीपुर-रिसिया मार्ग पर जलनिकासी की व्यवस्था न होने से जलभराव हो गया है। नगर पालिका के कई मोहल्लों में भी जलजमाव हो गया है।
बारिश से किसी भी फसल को नुकसान नहीं हुआ है। धान, मक्का, गन्ना, मेंथा व सब्जियों की फसल को काफी फायदा होगा। हालांकि किसानों को थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। सब्जियों के खेत में पानी न भरने दें।
-अनिल प्रसाद मिश्रा, कृषि अधिकारी