अशोका बुद्ध विहार में भिक्षुओं ने की पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती स्थित अशोका बुद्ध विहार में शुक्रवार को बौद्ध भिक्षुओं ने विशेष पूजा की। बौद्ध भिक्षु अशोक बौद्ध व भिक्षु देवेंद्र थेरों के नेतृत्व में आयोजित इस पूजा में मुख्य उपासक के रूप में गुनेश्वर प्रसाद मौजूद रहे।
पूजन के उपरांत बौद्ध भिक्षु अशोक बौद्ध ने कहा कि बुद्ध ने अहिंसा के पालन पर जोर दिया। उन्होंने कहा है कि मनुष्य को सभी जीवित प्राणियों से प्रेम करना चाहिए। उसे मन, वचन या कर्म से न तो किसी प्राणी को कष्ट देना चाहिए, और न ही उसे चोट पहुंचाना चाहिए। बौद्ध धर्म ने कर्म के नियम पर बहुत जोर दिया। इसके अनुसार वर्तमान का निर्धारण पूर्व के कर्मों से होता है। जीवन में और अगले जीवन में मनुष्य की स्थिति उसके अपने कार्यों पर निर्भर करती है। प्रत्येक व्यक्ति अपने भाग्य का निर्माता स्वयं है। हम अपने कर्म का फल पाने के लिए बार बार जन्म लेते हैं। इस प्रकार कर्म का सिद्धांत बुद्ध की शिक्षाओं का अनिवार्य हिस्सा है। बौद्ध भिक्षु देवेंद्र थेरों ने कहा कि बुद्ध ने मनुष्य के जीवन में अंतिम लक्ष्य ''निर्वाण'' का उपदेश दिया। ओल्डेनबर्ग जैसे कुछ विद्वानों का मत है कि निर्वाण का अर्थ वास्तव में अस्तित्व का विनाश है। हालाँकि निर्वाण शब्द की यह व्याख्या प्रारंभिक बौद्ध पाठ में प्रमाणित नहीं है। इन ग्रंथों के अनुसार, निर्वाण के नकारात्मक और सकारात्मक दोनों पक्ष हैं। निर्वाण का नकारात्मक पक्ष बार-बार होने वाले जन्म और मृत्यु के दुष्चक्र से दुख और मुक्ति के पूर्ण विराम का प्रतीक है। यह सांसारिक परिवेश से पूरी तरह से व्यक्तिपरक वापसी के साथ साथ जुनून, क्रोध, प्यास आदि जैसी पुरुषवादी भावनाओं को भी दर्शाता है। निर्वाण के सकारात्मक पक्ष में पूर्ण शांति और समता की स्थिति शामिल है। इस दौरान बौद्ध भिक्षु भंवरा नंद, नागरत्न, कीर्ति सागर, डॉ. धनंजय कुमार, धीरेंद्र कुमार, मोनिका आदि मौजूद रहीं। संवाद