श्रावस्ती। विकसित भारत व विकसित श्रावस्ती बनाने का सपना दिखा रहे जिम्मेदार विकास को लेकर कितना सजग हैं, इसकी एक बानगी जमुनहा विकासखंड की ग्राम पंचायत महरू मुर्तिहा में देखने मिलती है। ग्राम पंचायत की आधी आबादी बिना बिजली के ही गुजर-बसर करने को मजबूर है।
700 से अधिक की आबादी अब भी अंधेरे की बेड़ियों में जकड़ी है। बिजली के अभाव में शाम होते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है और ग्रामीणों को मोमबत्ती का सहारा लेना पड़ता है। ऐसा तब है जब श्रावस्ती आकांक्षात्मक जिला है और यहां विकास के लिए अतिरिक्त बजट दिया जाता है।
अंधेरे में डूबी महरू मुर्तिहा गांव की आधी आबादी को उस समय उजियारे की आस जगी जब साल 2018 में सौभाग्य योजना के तहत गांव में बिजली के खंभे तो लगाए गए। खंभे गड़ता देख ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई, लेकिन यह खुशी भी चंद दिनों में नदारद हो गई। जिम्मेदार खंभा लगाने के बाद तार खींचना भूल गए। अब भी 150 घर और 700 से अधिक की आबादी खंभों को टकटकी लगाए देखती है, लोग गांव को रोशन होने का ख्वाब संजोए हैं।
गांव निवासी लुकमान, प्रहलाद, सोनकर, राम प्रताप जायसवाल, राम गोपाल, अनवर अली, पिंटू सोनकर, महेश कुमार सोनकर, कैलाश और ओमकार सोनकर आदि ने बताया कि मोमबत्ती के सहारे रात कटती है। मोबाइल व टॉर्च चार्ज करने के लिए हमें दूसरों के घर जाना पड़ता है।
गर्मी के दिनों में होती है सबसे ज्यादा परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें गर्मी के दिनों में होती है। जहां आधे गांव के लोग गर्मी से निजात पाने के लिए पंखे का आनंद लेते हैं, तो वहीं वे लोग अब भी हाथ के पंखे इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बिजली न होने से बच्चों की पढ़ाई भी बाधित होती है और उन्हें मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ना पड़ता है।