श्रावस्ती। जिले में गांवों के विकास की रफ्तार कुंद होकर धीमी पड़ चुकी है। इसका कारण ग्राम विकास अधिकारियों व ग्राम पंचायत अधिकारियों के करीब 75 प्रतिशत पद का रिक्त होना है। सौ कलस्टर व उनमें शामिल 397 ग्राम पंचायतों के विकास की जिम्मेदारी 61 ग्राम विकास व ग्राम पंचायत अधिकारी संभाल रहे हैं। ऐसे में किसी के पास दो तो किसी के पास ग्यारह ग्राम पंचायतें के विकास की जिम्मेदारी है।
तीन तहसील व पांच विकास खंड वाले इस जिले में सौ कलस्टर ग्राम व 397 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। जिनके विकास की जिम्मेदारी ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम पंचायत अधिकारी (ग्राम सचिव) की होती है। जिले में 38 ग्राम विकास अधिकारी व 23 ग्राम पंचायत अधिकारी की ही तैनाती है। इनमें से औसतन दो-एक ग्राम सचिव अक्सर विभिन्न कारणों से निलंबित होने के कारण डीपीआरओ कार्यालय अथवा सीडीओ कार्यालय से संबद्ध रहते हैं। ऐसे में 59 ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम पंचायत अधिकारी ही गांव के विकास की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
जिले में देखा जाए तो दो ग्राम सचिवों को 11 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी दी गई है। इसी क्रम में पांच ग्राम सचिव 10 ग्राम पंचायतें संभाल रहे हैं। वहीं पांच ग्राम सचिव को नौ, 12 ग्राम सचिव को आठ, सात ग्राम सचिव को सात, सात ग्राम सचिव को छह, चार ग्राम सचिव को पांच, 11 ग्राम सचिव को चार, तीन ग्राम सचिव को तीन एवं दो ग्राम सचिव को दो ग्राम पंचायतों के विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दो ग्राम सचिव अनियमितता के आरोप में निलंबित हैं।
ऐसे में कई कई गांवों की जिम्मेदारी होने के कारण ग्राम सचिव सप्ताह में एक बार भी गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी आनंद प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि ग्राम सचिव की कमी से इंकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत सहायकों की तैनाती है। मनरेगा कार्यों की निगरानी के लिए मेट भी मौजूद हैं। ऐसे में गांव के विकास में सचिवों की कमी कोई भी रोड़ा नहीं अटका रही है।