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दुखों से मुक्ति दिलाना ही बौद्ध धर्म का मुख्य उद्देश्य

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बौद्ध सांस्कृतिक महासभा श्रावस्ती बुद्ध विहार में श्रावस्ती में पूजा करते बौद्ध भिक्षु। - फोटो : SRAWASTI
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध सांस्कृतिक महासभा श्रावस्ती के बौद्ध भिक्षुओं ने शुक्रवार को बुद्ध विहार में वर्षावास पूजा की। इस दौरान भिक्षुओं ने बौद्ध धर्म गुरु के नेतृत्व में तपोस्थली के अन्य मूमेंटों में जाकर विश्व शांति के लिए प्रार्थना की।
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वर्षावास पूजा के दौरान बौद्ध धर्म गुरु बौद्ध भिक्षु डिकुंग क्या बगुन रीपोनछे ने कहा कि बौद्ध दर्शन का अभिप्राय उससे है जो भगवान बुद्ध के निर्वाण के दौरान बौद्धधर्म के विभिन्न संप्रदायों की ओर से विकसित किया गया। बाद में बौद्ध धर्म का पूरे एशिया में प्रसार हुआ। बौद्ध धर्म का मुख्य उद्देश्य मानव जाति को दुख से मुक्ति दिलाना है। कर्म, ध्यान एवं प्रज्ञा इसके साधन रहे हैं।
बुद्ध के उपदेश तीन पिटकों में संकलित हैं। जो पिटक, विनय पिटक और अभिधम्म पिटक कहलाते हैं। यह पिटक बौद्ध धर्म के आगम हैं। बुद्ध के अनुसार परिवर्तन ही सत्य है। आत्मा भी मनोभावों और विज्ञानों की धारा है। इस प्रकार बौद्धमत में उपनिषदों के आत्मवाद का खंडन करके अनात्मवाद की स्थापना की गई है। फिर भी बौद्धमत में कर्म और पुनर्जन्म मान्य हैं।
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आत्मा को न मानने पर भी बौद्धधर्म करुणा से ओतप्रोत हैं। दुख से द्रवित होकर ही बुद्ध ने सन्यास लिया, और दुख से दूर रहने का उपाय खोजा। बौद्ध भिक्षु सतवीर प्रमोक्षा ने कहा कि अनात्मवादी होने के कारण बौद्ध धर्म का वेदांत से विरोध हुआ। इस का फल यह हुआ कि बौद्ध धर्म को भारत से निर्वासित होना पड़ा। एशिया के पूर्वी देशों में उसका प्रचार हुआ।
बुद्ध के अनुयायियों में मतभेद के कारण कई संप्रदाय बन गए। जैन संप्रदाय वेदांत के समान ध्यानवादी है। इसका चीन में प्रचार है। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु जल छन लामा, अशोक बौद्ध, बौद्ध भिक्षु देवेंद्र, भिक्षु नागलोक, धम्म सागर, श्रद्धालोक महाथेरो, दीपा लोक महाथेरो आदि भिक्षु मौजूद रहे।
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