तपोस्थली स्थित गंधकुटी पर प्रार्थना करते अनुयायी व भिक्षु।
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती शुक्रवार को अनुयायियों से गुलजार रही। थाईलैंड से 120 अनुयायियों का दल शुक्रवार को तपोस्थली पहुंचा। इस दौरान दल के सदस्यों ने भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में गंधकुटी पर विशेष प्रार्थना की।
इस दौरान भिक्षु देवानंद ने कहा कि बुद्ध की शिक्षाओं का सार है शील, समाधि और प्रज्ञा। सर्व पाप से विरत ही ‘शील’ है। शिव में निरंतर निरत ‘समाधि’ है। इष्ट अनिष्ट से परे संभाव में रति ‘प्रज्ञा’ है। भगवान बुद्ध प्रज्ञा व करुणा की साक्षात मूर्ति थे। ये दोनों ही गुण उनमें उत्कर्ष की पराकाष्ठा प्राप्त कर समरस होकर समाहित हो गए थे। बुद्ध के अनुसार एक मानव का दूसरे मानव के साथ व्यवहार मानवता के आधार पर होना चाहिए न कि जाति, वर्ण और लिंग आदि के आधार पर। इस मौके पर काफी संख्या में बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे। (संवाद)