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महिलाओं की शिक्षा के बिना देश का विकास अधूरा

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श्रावस्ती में शुक्रवार को अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत आयोजित कार्यक्रम में मौजूद मह - फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। देश की आधी आबादी महिलाओं को घर की चारदीवारी से बाहर निकलना होगा। महिलाएं जब तक स्वस्थ व शिक्षित नहीं होंगी, तब तक देश व समाज का विकास अधूरा है। सभी को चाहिए कि वह बेटा बेटी में फर्क न कर बेटियों को आगे बढ़ने के लिए खुला आसमान दें।
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यह बातें शुक्रवार को अमर उजाला की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत इकौना के ग्राम महदेइया के मजरा मिश्रीपुरवा में स्थित ग्राम सचिवालय में आरसेटी के नेतृत्व में आयोजित गोष्ठी में महिलाओं ने कही।
महिलाओं ने कहा कि बेटियों के पंखों को उड़ान देने के लिए न सिर्फ उन्हें शिक्षित बनाएं, बल्कि उनमें छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए पूरा मौका दें। सही समय आने पर ही उनका विवाह करें, क्यों कि बेटियां एक नहीं दो घरों को रोशन करती हैं। पढ़ी लिखी माता ही राष्ट्र की भाग्य विधाता बन सकती है।
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माता-पिता को चाहिए कि वह अपनी बेटियों को सबसे महत्वपूर्ण पूंजी शिक्षा जरूर दिलाएं, ताकि विपरीत परिस्थितियों में बेटियां खुद के पैरों पर खड़े होकर सम्मान जनक जीवन जी सकें।
जिस घर में महिलाओं की हंसी गूंजती है, उस घर में लक्ष्मी का वास होता है। यह तभी संभव है जब परिवार की बहू बेटियां शिक्षित व स्वस्थ हों, तथा उन्हें अपनी बात कहने की पूरी आजादी हो। - बिट्टू देवी
लोगों को यह सोचना बंद करना होगा कि औरत कमजोर होती है। आज महिलाएं पुरुषों से कई क्षेत्रों में आगे हैं। उन्हें और आगे बढ़ने का मौका दिया जाए तो वह सभी क्षेत्रों में नाम रोशन कर सकती हैं। - संगीता
वह माता पिता जो अपनी बेटे व बेटियों का विवाह कम उम्र में कर देते हैं, वह उनके जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। इसके चलते बेटियां कई बीमारियों का शिकार हो रही हैं, इस पर रोक लगानी होगी। - ऊषा देवी
किसी भी घर में खुशहाली तभी आ सकती है, जब सभी निरोगी हो। इसके लिए जरूरी है कि बेटा और बेटी को उचित शिक्षा दिलाने के साथ ही उनका सही समय पर विवाह किया जाए। - पूनम मिश्रा
सरकार महिलाओं को समानता का अधिकार दे रही है, लेकिन वह आज भी कई क्षेत्रों में उपेक्षा का शिकार हैं। हमें इस भेदभाव को मिटा कर महिलाओं को उचित स्थान व सम्मान दिलाना होगा। - इंदू मिश्रा
पंचायत से लेकर लोकसभा तक महिलाएं चुनाव लड़ती हैं और जीती भी, लेकिन 90 प्रतिशत महिला जनप्रतिनिधियों का कार्य उनके परिवार के पुरुष देखते हैं। यह भेद भाव मिटाना होगा। - ऊषा देवी
समाज में आज भी संकीर्ण मानसिकता के लोग लड़का व लड़की में भेद करते हैं। महिलाओं के प्रति गलत भावना रखते हैं। उन्हें अपने विचार बदलने होंगे। इसके लिए महिलाओं को आगे आना होगा। -पूनम
परिवार में जो सम्मान व दुलार बेटियों को मिलता है, वह बहू को नहीं मिलता। जबकि बहू भी किसी की बेटी है। ऐसे में जो प्यार बेटी को देते हैं। वहीं प्यार व सम्मान बहू को भी देना चाहिए। - मोहिनी मिश्रा
बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है। माता पिता को चाहिए कि वह इसे अपनी बेटियों को दिलाएं, ताकि विपरीत परिस्थितियों में बेटियां खुद के पैरों पर खड़े होकर सम्मान जनक जीवन जी सकें। - शारदा देवी
महिलाओं को अपने हक के लिए आगे आना होगा। देखा जाए तो सही मायने में महिलाओं का शोषण करने में पुरुषों की अपेक्षा महिला ज्यादा जिम्मेदार है। इस लिए बदलाव की शुरूआत खुद से करनी चाहिए। - किरन देवी
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