श्रावस्ती जमुनहा में कटलिया चौराहे के पास कटा मार्ग।
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श्रावस्ती। तराई में बरसात थमने के साथ ही अब राप्ती की लहरें भी शांत हो गई है। नदी के पुराने स्वरूप में आ जाने से कटान भी थम गई गई। इससे कछार के गांव में बाढ़ व कटान का खतरा फिलहाल टल गया है। वहीं बाढ़ से कटे मार्ग व पटरियों के कारण काछार वासियों की मुश्किलें बरकरार हैं। लोगों को संक्रामक रोगों का खतरा भी सता रहा है।
नेपाल के साथ पहाड़ों पर हुई तेज बरसात के कारण उफनाई राप्ती ने जिले में कहर बरपाना शुरू कर दिया था। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर चला गया था। इससे कई गांव टापू बन गए थे। अब राप्ती में पानी घट रहा है। ऐसे में गांवों में गंदगी व जलभराव की स्थिति है। विगत तीन दिनों से निकल रही चटक धूप के कारण उमस काफी बढ़ गई है। इससे संक्रामक रोगों का खतरा सता रहा है।
कई गांव में बुखार, डायरिया का प्रकोप होने के कारण लोग आसपास के चिकित्सकों से अपना इलाज कराने को विवश है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से संबंधित गांवों का अब तक निरीक्षण तक नहीं किया गया। जिससे कछारवासियों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।
काटी सड़क, आवागमन में समस्या
जमुनहा। बाढ़ के दौरान रिसिया मिर्जापुर मार्ग पर कटलिया चौराहे के निकट चारों तरफ पानी भरने से किसानों की फसल डूब गई थी। खेत में लगी मक्का, अरहर आदि की फसल खराब हो जाने के कारण किसान उसे मवेशियों को खिलाने को विवश हैं। वहीं खेत में बची फसल को सुरक्षित करने के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने सड़क काट दी है। इससे क्षेत्रवासियों को आवागमन की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
सहायक अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग हीरालाल यादव ने कहा कि ग्रामीणों की ओर से रिसिया मिर्जापुर मार्ग कटे जाने का मामला संज्ञान में आया है। उसकी जांच कराकर काटे गए मार्ग की मरम्मत कराई जाएगी। जिससे आवागमन बहाल हो सके।