मल्हीपुर में बेची जा रही थाई मांगुर मछली।- संवाद
तुलसीपुर। जमुनहा तहसील क्षेत्र में प्रतिबंध के बाद भी थाई मांगुर मछली धड़ल्ले से बेची जा रही है। स्थानीय लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के वाहक के रूप में जानी जाने वाली यह मछली खरीदकर सेवन कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी थाई मांगुर मछली की खरीद व बिक्री पर अंकुश लगाने में रुचि नहीं ले रहे हैं।
स्वास्थ्य कारणों के चलते भारत सरकार की ओर से थाई मांगुर मछली को साल 2000 में ही प्रतिबंधित कर दिया गया है। वर्तमान में थाई मांगुर मछली के पालन व बेचने पर रोक है और ऐसा करते मिलने पर कार्रवाई का नियम है। बावजूद इसके, जमुनहा क्षेत्र में धड़ल्ले से यह मछली बेची जा रही है।
स्थानीय पुलिस व मत्स्य विभाग के जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते तहसील क्षेत्र में बदला चौराहा, मिर्जापुर चौराहा, नासिरगंज बाजार, बोहरवा चौराहा, मल्हीपुर बैरियर चौराहा, बनगई, जमुनहा बाजार में खुलेआम मछली बेची जा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बहराइच के शंकरपुर चौराहे के पास गोदाम में थाई मांगुर मछली बाहर से मंगवाकर इकट्ठा की जाती है और फिर यहीं से पिकअप द्वारा सभी जगहों पर भेजी जाती है।
अधिक मुनाफे के लिए कर रहे कारोबार
जानकारों के मुताबिक थाई मांगुर तेज प्रजनन वाली मछली की प्रजाति है। अन्य मछलियों की अपेक्षा इस मछली का विकास दोगुनी तेजी से होता है। यही कारण है कि अन्य मछलियों की अपेक्षा प्रतिबंध के बाद भी लोग इसका पालन व बिक्री कर रहे हैं।