जेतवन परिसर में बृहस्पतिवार को प्रार्थना करते थाईलैंड के अनुयायी। - संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बृहस्पतिवार को थाईलैंड से आए अनुयायियों के 40 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक ढंग से बोधिवृक्ष का पूजन-अर्चन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा के दौरान भिक्षु देवानंद ने कहा कि बुद्ध की शक्ति आध्यात्मिक ज्ञान, गहन ध्यान और आत्म-अनुशासन से उत्पन्न होती है। इसमें मानसिक क्षमताएं, लोगों को सही मार्ग दिखाने की क्षमता और सांसारिक मोह से मुक्ति शामिल है। बौद्ध धर्म में ये शक्तियां मुख्य रूप से अनुभव ज्ञान, विवेक, प्रज्ञा और करुणा के रूप में प्रकट होती हैं। ये गुण लोगों को मुक्ति की ओर ले जाने में सक्षम बनाते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि बुद्ध ने अपने ज्ञान और विवेक का उपयोग अज्ञानता को दूर करने व सच्चाई का मार्ग दिखाने के लिए किया। उनके पास प्रज्ञा थी, जिससे वे सत्य-असत्य में भेद कर पाते थे और लोगों के संदेहों का समाधान भी करते थे।
गहन ध्यान और आत्म-अनुशासन से बुद्ध ने ऐसे अनुभव प्राप्त किए जो सामान्य मनुष्यों के लिए संभव नहीं थे। बुद्ध ने अपनी करुणा और प्रेम के बल पर सभी प्राणियों को मुक्त करने के तरीके सिखाए। बौद्ध सभा के बाद अनुयायियों ने जेतवन परिसर का भ्रमण कर उसके इतिहास की जानकारी ली।