स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण करते प्राचार्य व अन्य।
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श्रावस्ती। स्वामी दयाल सरस्वती शिशु मंदिर भिनगा में रविवार को स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाई गई। इस दौरान वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद को विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु बताते हुए उनके जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में दिनेश सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त उस समय कलकत्ता हाईकोर्ट के अधिवक्ता थे। उनकी माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक विचारों की महिला थीं। स्वामी विवेकानंद ने 25 वर्ष की उम्र में परिवार को छोड़ संन्यास धारण कर लिया था। वह विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु थे। उनके विचारों को अपनाकर जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया सकता है।
जेपी मिश्र मधुकर ने कहा कि 1893 में अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म महासभा हुई थी। इसमें विवेकानंद जी ने हिंदी में भाषण देकर अंग्रेजों को भारत की संस्कृति से प्रभावित किया। विद्यालय के प्राचार्य जय प्रकाश तिवारी ने कहा कि स्वामी जी ने कहा था कि जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो, ठीक उसी समय पर उसे करना ही चाहिए, नहीं तो लोगों का आप पर से विश्वास उठ जाता है। जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते।
सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा। जिस दिन आपके सामने कोई समस्या न आए, आप यकीन कर सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर चल रहे हैं। इस मौके पर वेद प्रकाश गुप्ता, योगेश कुमार, नंद किशोर मौर्या, समयदीन गुप्ता सहित कई अन्य मौजूद रहे।