गिलौला कस्बे में अलाव तापते लोग।- संवाद
श्रावस्ती। तराई में छह किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही सर्द पछुआ हवा से ठंड बढ़ गई है। घना कोहरा भी तराई वासियों के लिए मुसीबत बना है। बुधवार रात आठ बजे से बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे तक घने कोहरे की चादर में तराई सिमटी रही। हालांकि दोपहर में हल्की धूप निकली, लेकिन हवा के चलते पूरे दिन गलन बरकरार रही।
जिले में तीन दिनों से चल रही बर्फीली हवा से तापमान गिर गया है। दोपहर में खिली हल्की धूप ने लोगों को ठंड से थोड़ी राहत प्रदान की, लेकिन गलन पूरे दिन बरकरार रही। बुधवार रात में छाया घना कोहरा वाहन चालकों के लिए मुसीबत का सबब बन गया। दृश्यता घटकर मात्र तीन से चार मीटर तक ही रही। ऐसे में बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे तक वाहनों की रफ्तार धीमी रही।
मसहाकला के किसान रामबरन वर्मा ने बताया कि कोहरा गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद है, लेकिन यदि कोहरा नहीं होता है और गलन वाली ठंड पड़ती है, तो सरसों, मटर, चना व मसूर आदि की फसल को नुकसान हो सकता है। संतलिया निवासी किसान विकास मिश्रा ने बताया कि अभी पाला पड़ने से सरसों की फसल को काफी नुकसान होगा। फसल में फूल आ चुके हैं, इससे दानों का भराव कम होगा।