श्रावस्ती। भारत नेपाल के बीच बिगड़ते संबंध अब दोनों देशों के नागरिकों को दर्द पहुंचा रहे हैं। रोटी-बेटी के संबंध वाले इस देश के नागरिक सीमा पर खड़े होकर ‘नेपाल का हितैषी कौन... भारत भारत भारत’ का पोस्टर लहरा रहे हैं। वहीं भारत नेपाल में ब्याही गई बेटियों से मिलने नो मैंस लैंड पर पहुंच रही माताएं घंटों एक दूसरे से लिपट कर रो रही हैं। भारत व नेपाल के दोनों नागरिक पुरानी व्यवस्थाओं के बहाली की मांग कर रही हैं।
भारत-नेपाल के बीच चीन के दबाव में उपजे ताजा हालात को अब नेपाली मूल के नागरिक भी मानने को तैयार नहीं। वह हर हाल में भारत से पुराने संबंधों की उम्मीद जगाएं हैं। नेपाली नागरिक चाहते हैं कि जिस प्रकार अब तक भारत के साथ उनका रोटी-बेटी का संबंध रहा है, वैसा ही कायम रहे। इसके लिए नेपाली नागरिक सड़क पर उतर कर प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
शनिवार को बहराइच के रुपईडिहा बॉर्डर व श्रावस्ती के जमुनहा क्षेत्र में कई जगह नेपाली नागरिकों ने अपने परिवारजनों के साथ पोस्टर लहराए। इस प्रदर्शन की अगुवाई महिलाएं कर रही थी। यह वे नेपाली परिवार हैं जो भारत के विभिन्न महानगरों में रह कर नौकरी व व्यापार करते हैं। लेकिन लॉकडाउन के समय वह नेपाल में अपने घरों की ओर लौट गए थे। अब पुन: भारत आना चाहते हैं। लेकिन सीमा पर उपजे विवाद को लेकर सीमा पर तैनात एसएसबी व नेपाल स्थित एआरएफ उन्हें रोक रही है। इसको लेकर लोग आक्रोशित हैं।
जब दुल्हन को सीमा पर दहेज समेत रोका गया...
नेपाल पर चीन का प्रभाव देानेंा देशों के नागरिकों को कितना दर्द दे रहा है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत के बाराबंकी निवासी मोहम्मद अकरम का विवाह नेपाल के जिला बर्दिया के गुलरिया न्याय पंचायत निवासी नूरी के साथ शुक्रवार को हुआ था। इस दौरान नूरी के पिता ने अपनी बेटी को दान-दहेज भी दिया जिसे लेकर वह शनिवार भारत आना चाहती थी। दोनों देशों के तल्खी के बाद भी नेपाल पुलिस ने अपने क्षेत्र की बेटी का सहयोग करते हुए उसे रुपईडिहा बार्डर तक पहुंचा दिया। लेकिन भारतीय क्षेत्र में तैनात एसएसबी ने दुल्हन को नेपाली नंबर के वाहन के साथ आने ही नहीं दिया। इस पर दुल्हन को अपने दहेज का सामान लाद कर बारातियों के साथ 200 मीटर सीमा क्षेत्र पर आने दिया। इसी के बाद वह भारतीय वाहन से वह बाराबंकी के लिए रवाना हो पाए।
भारत में कार्यरत नेपालियों को भी परेशानी
भारतीय सीमाओं पर आंदोलित नेपाली मूल के लोगों को दर्द है कि उन्हें भारत नहीं आने दिया जा रहा है। यदि नेपाली आंकड़ोंपर गौर करें तो करीब पचास लाख नेपाली मूल के नागरिक भारत में नौकरी व व्यवसाय करते हैं। भारत में लाकडाउन में दीे गई ढ़ील के बाद वह वापस लौटना चाहते हैं। लेकिन नेपाल सरकार उन्हें वापस जाने की इजाजत उन्हें अघोषित रूप से नहीं दे रही है। वहीं नेपाली सीमा पर तैनात एसएसबी भी नेपाली नागरिकों को भारत आने से रोक रही है। जिसको लेकर नेपाली नागरिक आंदोलित है।
नेपाल से भारत में आने के लिए घोषित रूप से कोई भी गेटवे नहीं है। इसलिए इधर से नेपाली नगारिकों को इजाजत नहीं दी जा रही है। इस क्षेत्र से लगी सीमा में केवल बहराइच के रुपईडिहा से ही लीगल रूप से भारत आने जाने का गेटवे है। वहां से लोग आ जा सकते हैं।
बीसी दुबे, एएसपी