अपना उत्पाद दिखातीं कोमल देवी। - संवाद
वीरपुर। कहते हैं कि लहरों से लड़कर नौका पार नहीं होती और हिम्मत रखने वालों की कभी हार नहीं होती है। इन लाइनों को कटरा गांव की कोमल ने चरितार्थ कर दिखाया है। उन्होंने जीवन में आईं मुसीबतों से डटकर सामना किया और आज दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं।
कटरा गांव निवासी कोमल में शुरू से ही कुछ नया करने की लालसा रहती थी। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने 50 हजार की मदद से फिनाइल व लिक्विड डिटर्जेंट का काम शुरू किया ही था कि उनके पति शिवनाथ चौधरी एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए।
अब मानो कोमल पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। पति का इलाज, बच्चों की पढ़ाई और परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ पड़ी। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, जैसे-तैसे दुर्घटना में घायल पति का ऑपरेशन कराया। इसके बाद मुख्यमंत्री उद्यम योजना से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर काम को नए सिरे से शुरू किया।
शुरुआती दिनों में मात्र 10 हजार रुपये की आमदनी बड़ी मुश्किल से हो पाती थी। लगभग दो वर्ष के कड़े संघर्ष के बाद उन्हें परिश्रम का फल भी प्राप्त हुआ। अब वह महीने के लगभग 25 हजार रुपये तक कमा लेती हैं, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण हो अच्छे ढंग से हो जाता है।
इतना ही नहीं, उनके साथ जुड़ीं कई महिलाओं को भी आर्थिक लाभ हो रहा है। इससे अब कोमल लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। क्षेत्र में लोग उनकी मिसाल देकर अन्य लोगों को नसीहत देते हैं।