श्रावस्ती। परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मानकों को ताक पर रख कर ड्रेस का वितरण कर दिया गया। कई विद्यालयों में बच्चों को एक ड्रेस ही दिया गया। वहीं अभियान चला कर जिला स्तरीय अधिकारियों की ओर से विद्यालयों में वितरित यूनीफार्म की जांच कराई गई। इसमें जांच अधिकारियों को सब कुछ दुरुस्त मिला। जबकि भिनगा नगर सहित कई अन्य विद्यालयों में मानक विहीन ड्रेस वितरण का प्रमाण देखा जा सकता है।
शासन की ओर से परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षणरत छात्र छात्राओं को ड्रेस, जूता मोजा, स्कूल बैग आदि देने की व्यवस्था की गई है। इसके तहत बच्चों की ड्रेस की माप कराकर उसकी सिलाई करवाने के बाद वितरित करने का आदेश दिया गया था। इसका जिले में कहीं भी अनुपालन नहीं हुआ।
विभाग की ओर से ठेकेदारों के माध्यम से गुणवत्ता विहीन ड्रेस वितरित करा दी गई। इसका परिणाम यह रहा कि छोटे बच्चों को बड़ा व बड़े बच्चों को छोटा ड्रेस वितरित कर दिया गया। इतना ही नहीं किसी बच्चे की शर्ट की आस्तीन छह इंच तक बड़ा तो किसी बच्ची की सलवार छह इंच छोटी दे दी गई। यही नहीं कुछ बच्चियों को पैंट व शर्ट थमा दिया गया।
इसकी तमाम शिकायतें भी हुई। जिसे संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन की ओर से एक ही दिन में अभियान चलाकर बच्चों के ड्रेस की गुणवत्ता की जांच कराई गई। जांच में हर बार की तरह सब कुछ ठीक ठाक मिला। वहीं भिनगा नगर सहित कलेक्ट्रेट के आसपास के विद्यालयों में भी बच्चों को गुणवत्ता विहीन ड्रेस वितरित करा दिया गया। यही नहीं कुछ विद्यालयों में बच्चों को दो के स्थान पर एक एक ड्रेस ही वितरित किया गया, लेकिन जांच में यह खामियां उजागर नहीं हुई।
409 विद्यालयों में एक साथ हुई थी जांच
जिले में संचालित 1208 विद्यालयों में से पांच सिंतंबर को 409 विद्यालयों में एक साथ ड्रेस वितरण की जांच कराई गई। जांच के दौरान अधिकारियों की ओर से न तो ड्रेस की गुणवत्ता जांची गई, और न ही उसके माप की ही जांच हुई। अधिकारियों की ओर से सिर्फ कपड़े की गुणवत्ता ही जांची गई कि ड्रेस का कलर, नमूना सही है अथवा नहीं। बाकी ड्रेस छोटा है या बड़ा इसकी न तो किसी ने जांच की और न ही इस बारे में कोई रिपोर्ट ही किसी अधिकारी ने उच्च अधिकारी को भेजी।
होती रही जांच नहीं हुई कार्रवाई
जिले में ड्रेस वितरण में अनियमितता की शिकायत प्रति वर्ष होती रही। हर बार कभी बीएसए स्तर से तो कभी डीएम के स्तर से इसकी जांच भी कराई गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर न तो किसी ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट किया गया और न ही इसके लिए किसी जिम्मेदार अधिकारी अथवा शिक्षक पर कभी कोई कार्रवाई ही की गई।
अधिकारियों की ओर से कुल 409 विद्यालयों में ड्रेस की गुणवत्ता की जांच की गई। इस दौरान कहीं कोई कमी नहीं मिली। ऐसे में संभव है कि शिक्षकों की ओर से बाद में बच्चों का ड्रेस बदलवा दिया गया हो। यदि कहीं कोई कमी है तो अभी जांच की जाएगी। जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।
- ओमकार राणा, बीएसए