जेतवन परिसर का भ्रमण करते बौद्ध अनुयायी। - संवाद
कटरा। श्रीलंका के अनुयायियों का 40 सदस्यीय दल शनिवार को दर्शन-पूजन के लिए बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। सभी ने बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो के नेतृत्व में गंध कुटी पर पूजा-अर्चना की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु दीपालोक ने कहा कि भगवान बुद्ध के मुख्य उपदेशों में चार आर्य सत्य व आष्टांगिक मार्ग शामिल हैं। दुख का कारण इच्छा है, दुख का निरोध संभव है और दुख निवारण का मार्ग है।
उन्होंने आगे कहा कि अष्टांगिक मार्ग सही समझ, सही विचार, सही वाणी, सही कर्म, सही आजीविका, सही प्रयास, सही स्मृति और सही समाधि हैं। ये सभी दुख से मुक्ति व मानसिक शांति का साधन हैं। सभा के बाद अनुयायियों ने परिक्रमा की।