गंध कुटी पर फूल पूजा करते अनुयायी।- संवाद
कटरा। श्रीलंका के अनुयायियों का 160 सदस्यीय दल मंगलवार को बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। सभी ने बौद्ध भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरो के नेतृत्व में गंध कुटी पर पारंपरिक ढंग से फूल पूजा की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरो ने बताया कि गृहस्थ जीवन और राजसी सुख-सुविधाओं को त्याग कर गौतम बुद्ध तपस्वी बन गए। अन्य तपस्वियों की तरह वह भी भोजन प्राप्त करने के लिए भिक्षा पात्र लेकर नगर-नगर भटकते थे।
भिक्षु श्रद्धालोक ने आगे बताया कि एक दिन गौतम बुद्ध राजगृह नामक नगर पहुंचे, जो राजा बिम्बिसार का राज्य था। राजा बिम्बिसार ने तपस्वी गौतम से भिक्षावृत्ति और घुमक्कड़ जीवन त्यागने की विनती की और अपना राज्य उनके साथ साझा करने की पेशकश की।
हालांकि गौतम बुद्ध मानव पीड़ा को दूर करने के मार्ग की खोज जारी रखने के लिए दृढ़ थे और उन्होंने राजा के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इस दौरान उन्होंने राजगृह में दोबारा आने के बिम्बिसार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
गौतम बुद्ध ने दो प्रमुख ध्यान शिक्षकों अलारा कलाम और उद्दका रामपुत्त से भेंट की और बहुत ही कम समय में ध्यान की विधियों में महारत हासिल की। ध्यान की जानकारी के बाद उन्होंने राज्य छोड़ दिया। उनके साथ कोडन्ना, भद्दिया, वप्पा, महानामा और अस्साजी नाम के पांच तपस्वी भी चल पड़े।
सभी के बाद सभी अनुयायियों ने गंध कुटी का भ्रमण किया।