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किसानों के लिए लाभदायक है स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति

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श्रावस्ती। आज कृषि उद्योग एवं पेयजल आपूर्ति के विभिन्न आवश्यकताओं में पानी की उपयोगिता बढ़ी है। पानी को व्यवस्थित ढंग से उपयोग नहीं करने पर जलस्तर में गिरावट आ रही है। निरंतर बढ़ती जनसंख्या व जलश्रोतों के असीमित दोहन से जल की आवश्यकता बढ़ी है।
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ऐसी स्थिति में जल संसाधनों को सुव्यवस्थित एवं विवेकपूर्ण तरीके से कृषि के लिए उपयोग लाने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। जल का सीमित उपयोग करके किसान अधिक क्षेत्र में फसल बोकर अधिक उत्पादन ले सकते हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत स्प्रिंकलर पद्धति (फौव्वारा पद्धति) से फसलों की सिंचाई डार्क, सेमी डार्क क्षेत्रों के किसानों के लिए बड़ी ही उपयोगी सिद्ध हो रही है।
यह बातें शुक्रवार को किसानों के नाम जारी अपील में जिला कृषि अधिकारी आरपी राणा ने कहीं। उन्होंने कहा है कि सिंचाई के लिए नहर, नलकूप, तालाब, कुएं, झील, नदियों आदि के पानी का उपयोग करते हैं।
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लेकिन सिंचाई की इन विधियों में स्प्रिंकलर पद्धति एक ऐसी पद्धति है जिसे अपनाकर जल प्रबंधन के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। यह पद्धति सिंचाई की उन्नत और आधुनिक पद्धति है। इसमें सिंचाई क्यारियों में न करके पाइपों एवं नाजल के माध्यम से वर्षा के रुप में की जाती है।
यह पद्धति जल संरक्षण के साथ ही मृदा क्षरण रोकने तथा भू संरक्षण में भी सहायक होती है। इस विधि से सिंचाई करते समय जल बाहर नहीं जाता है। बोई गई फसल और भूमि की नमी बरकरार रहती है। इस विधि से 30 से 50 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। इससे किसानों की आय दोगुना हो सकती है। किसान इस योजना से लाभ लेने के लिए कृषि एवं उद्यान विभाग से संपर्क करके लाभ उठा सकते है।
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